नजीबाबाद-कोटद्वार के बीच सूकरो नदी रेल पुल का क्षतिग्रस्त पिलर देखते रेलवे के तकनीकी अधिकारी।
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नजीबाबाद में बड़ौदा हाउस दिल्ली से आए रेलवे के तकनीकी उच्चाधिकारियों ने सूकरो रेलवे पुल का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने माना कि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के बगैर पुल के शेेष पिलरों का अस्तित्व बचाना संभव नहीं होगा। अधिकारियों ने लोहे की शीट की पाइलिंग के जरिये पिलर बचाने की कवायद शुरू की है।
कोटद्वार ब्रांच लाइन पर बने सूकरो रेलवे पुल के दो माह के भीतर दो पिलर ध्वस्त होने से रेलवे के तकनीकी अधिकारियों में हड़कंप मचा है। मंगलवार को दूसरा पिलर ध्वस्त होने से तकनीकी अधिकारियों की नींद उड़ गई। डीआरएम एवं तकनीकी विभाग के मंडलीय अधिकारियों की सूचना पर बड़ौदा हाउस के उच्चाधिकारियों ने रेल पुल के पिलर का निरीक्षण किया। डिप्टी चीफ ब्रिज इंजीनियर (डिजाइन) एसके शर्मा, डिप्टी चीफ इंजीनियर बीआर नेगी ने प्रवर मंडल अभियंता समन्वय आरपी सिंह, प्रवर मंडल अभियंता सामान्य पारितोष गौतम, एडीईएन सीताराम के साथ सूकरो रेलवे पुल का निरीक्षण किया। तकनीकी विभाग के उच्चाधिकारियों ने माना कि वर्तमान हालात में ब्रिज के शेेष पिलर बचाने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम जरूरी हैं।
तकनीकी अधिकारियों ने सूकरो रेलवे पुल के पिलरों के चारों ओर धरातल से तीन मीटर गहरा तथा तीन मीटर ऊंचा सुरक्षा कवच बनाने का निर्णय लिया है। रेलवे अधिकारियों ने पिलर के चारों ओर लोहे की मोटी शीट की पाइलिंग कर पिलर के नीचे की मिट्टी के कटान को रोकने की योजना बनाई है। उधर, 23 जुलाई को ध्वस्त पिलर भी शीघ्र तैयार करने के साथ पाइलिंग शीट के जरिए क्षतिग्रस्त पिलर को रेलवे जल्द दुरुस्त कराने की योजना बना रहा है। प्रिंसिपल इंजीनियर आरके अग्रवाल ने 15 अक्तूबर तक रेल संचालन दोबारा शुरू करने की घोषणा की थी। तकनीकी अधिकारी दूसरे पिलर की एक और दुश्वारी सामने आने के बाद उच्चाधिकारी द्वारा रेल संचालन शुरू करने की तिथि तय करने की घोषणा को चुनौती के रूप में स्वीकार कर रहे हैं। हालांकि पहले ही अगर समय रहते रेलवे विभाग के अधिकारी क्षतिग्रस्त पिलर की मरम्मत कर देते तो शायद ऐसी घटना न होती।