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किसानों को नहीं पता किस भाव बेच रहे गन्ना

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पिछले साल के मूल्य पर ही भुगतान कर रहीं चीनी मिलें
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बिजनौर। गन्ना पेराई का आधा सत्र करीब बीत चुका है, लेकिन अभी तक गन्ना मूल्य सरकार द्वारा घोषित नहीं किया गया है। किसानों को नहीं पता है कि उनके गन्ने का मूल्य क्या है। चीनी मिल भी पिछले साल के गन्ना मूल्य पर ही भुगतान कर रही है। ऐसा पिछले काफी लंबे समय से नहीं हुआ है जब गन्ना मूल्य जनवरी बीतने के बाद भी घोषित नहीं किया गया है।
चीनी के दाम पर चीनी मिलों का घाटा और मुनाफा तय होता है। बंपर उत्पादन की वजह से पिछले दो-तीन साल से चीनी के दाम बहुत कम चल रहे हैं। चीनी के दाम अगर अच्छे होते हैं गन्ना मूल्य बढ़ने की पूरी गुंजाइश रहती है। गन्ना मूल्य बढ़ना होता है तो मिलों के चक्के घूमने से पहले ही गन्ना मूल्य निर्धारित कर दिया जाता है, लेकिन अब चीनी के दाम बहुत गिर गए हैं इसलिए गन्ना मूल्य में वृद्धि होने की गुंजाइश बहुत कम है। कृषि कानून वापस लेने सहित अनेक मांगों को लेकर ढाई महीने से किसानों का आंदोलन भी चल रहा है। किसान नेताओं की नजर भी गन्ना मूल्य पर है। गन्ना मूल्य न बढ़ा तो किसान और बड़ा आंदोलन कर सकते हैं। आंदोलन की वजह से राज्य सरकार ने अब तक गन्ना मूल्य ही घोषित नहीं किया है। माना जाता है कि जनवरी में आधा गन्ना पेराई सत्र खत्म हो जाता है। आधा सत्र खत्म होने पर भी किसानों को यह नहीं पता चला है कि मिल को बेचे गए गन्ने के भाव क्या मिलेंगे।
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जिले के चीनी मिल में गन्ना पेराई पर एक नजर
चीनी मिल गन्ना पेराई
धामपुर 109.15
स्योहारा 97.59
बिलाई 70.42
बहादरपुर 61.22
बरकातपुर 60.24
बुंदकी 60.34
चांदपुर 29.35
बिजनौर 18.87
नजीबाबाद 23.09
योग 530.27
नोट: गन्ना पेराई लाख क्विंटल में है।
गन्ना मूल्य घोषित न होना सरकार की विफलता
भाकियू जिलाध्यक्ष कुलदीप सिंह के अनुसार जनवरी खत्म होने के बाद भी गन्ना मूल्य घोषित न कर पाना सरकार की विफलता है। इसके विरोध में शनिवार को चक्का जाम किया जा रहा है।
मिले लागत का डेढ़ गुना मूल्य
किसान नेता कैलाश लांबा के अनुसार सरकार को लागत का डेढ़ गुना मूल्य किसान को दिलाना चाहिए। सरकार केवल किसानों के खिलाफ ही फैसले ले रही है।
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