हिंदी माध्यम से पढे़ विद्यार्थी बने अधिकारी
बिजनौर। यदि आप यूपी बोर्ड के विद्यालय मे हिंदी माध्यम में पढ़ रहे हैं, तो अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों के छात्रों से स्वयं को कमतर आंकने की जरूरत नहीं है। क्योंकि शुक्रवार को आए यूपीपीएससी के परिणाम ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा के लिए बोर्ड के कोई मायने नहीं होते। जिले के सात युवक-युवती ने परीक्षा की मैरिट ने स्थान पाया है। इनका एसडीएम से लेकर विभिन्न प्रशासनिक पद पर चयन हुआ है। चयनित छात्र -छात्राओं में से पांच ग्रामीण पृष्टभूमि के हैं और इन्होंने हिंदी माध्यम में शिक्षा ग्रहण की है।
स्योहारा क्षेत्र के गांव शाहपुर खेड़ी निवासी सचिन राजपूत का चयन एसडीएम के लिए हुआ है। पिता गांव के ही एक स्कूल में शिक्षक हैं। सचिन भी इसी स्कूल में पढ़ा है। दिव्य प्रकाश ग्राम नरावली का रहने वाला है। कक्षा दस तक ताजपुर पढ़ा। बारहवीं गांव रुपपुर के यूपी बोर्ड के स्कूल से उत्तीर्ण की। उसका चयन असिस्टेंट कमिश्नर व्यवसायिक पद पर हुआ है। नूरपुर क्षेत्र के गांव रायपुरी बिज्जू निवासी सोमकार के पिता छोटे किसान हैं। पिता ने बेटे को गांव में ही पढ़ाकर कामर्शियल टैक्स आफिसर बना दिया है। गांव पनेड़ी का यतिन सिंह भी गांव में पढ़कर अधिकारी बना है। अफजलगढ़ क्षेत्र के गांव मुस्तफाबाद गठिया निवासी सत्येंद्र कुमार जिला लेखा परीक्षक बना है। उसने गांव के छोटे स्कूल में पढ़ने के बाद यूपी बोर्ड के स्कूल बीएसए इंटर कॉलेज कादराबाद से बारहवीं तक पढ़ाई की है।
जिले तथा विभाग का बढ़ा मान
बिजनौर। जिला विद्यालय निरीक्षक राजेश कुमार बताते हैं कि अब यूपी बोर्ड के स्कूल भी शैक्षिक तकनीकी सुविधाओं से सुसज्जित हैं। शिक्षक योग्य हैं। यूपी बोर्ड के स्कूलों में पढ़े छात्रों के चयन से विभाग तथा जिले का मान बढ़ा है। इससे अन्य छात्र प्रेरित होंगे।
एसडीएम बने स्योहारा के सचिन राजपूत।- फोटो : BIJNOR
कमर्शियल टैक्स ऑफिसर बने नूरपुर के सोमकार सिंह।- फोटो : BIJNOR
एक्साइज इंस्पेक्टर बने नूरपुर के यतिन सिंह।- फोटो : BIJNOR
जिला लेखा परीक्षक बने अफजलगढ़ के सतेन्द्र कुमार।- फोटो : BIJNOR