निजी कॉलेजों में दाखिला नहीं ले रहे विद्यार्थी
बिजनौर। कोरोना के कारण इस साल भी 12वीं में बंपर विद्यार्थी पास हुए हैं। इसके बाद भी निजी कॉलेज स्नातक प्रथम वर्ष में दाखिले के लिए आने वाले छात्र-छात्राओं की बाट जोह रहे हैं। निजी कॉलेजों में स्नातक प्रथम वर्ष की करीब 70 प्रतिशत सीटें खाली बताई गई हैं। छात्रों के दाखिला लेने नहीं आने से निजी कॉलेजों में बेचैनी है।
वर्ष 2021 की परीक्षा में इंटर के करीब 40 हजार तथा सीबीएसई, आईसीएसई के लगभग 80 हजार छात्र-छात्राएं पंजीकृत बताए गए हैं। कोरोना के कारण इस साल बोर्ड परीक्षा निरस्त करके सभी छात्रों को प्रमोट कर दिया गया है। छात्रों के बंपर संख्या में पास होने से इस साल डिग्री कॉलेजों में स्नातक प्रथम वर्ष में दाखिले के लिए जोर रहने का अनुमान था। परंतु स्थिति इसके बिल्कुल उलट दिखाई पड़ रही है। जिले में 101 डिग्री कॉलेज हैं। इनमें एक राजकीय डिग्री कॉलेज शेरकोट में है। इसके अतिरिक्त छह अशासकीय सहायता प्राप्त डिग्री कॉलेज बिजनौर मुख्यालय पर दो, धामपुर में दो तथा नजीबाबाद वह चांदपुर में एक एक डिग्री कॉलेज है। डिग्री कॉलेजों में स्नातक प्रथम वर्ष में अलग-अलग फैकल्टी की 5000 से अधिक सीट हैं।
जानकारी के अनुसार अशासकीय सहायता प्राप्त डिग्री कॉलेजों में दाखिला लेना छात्रों की प्राथमिकता होती है। बताया गया कि इन छह कॉलेजों में सभी फैकल्टी की स्वीकृत सीट दाखिले से पूरी हो हो गई हैं। साहू जैन कॉलेज नजीबाबाद के वाणिज्य विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मनीष गुप्ता ने बताया कि दाखिले मेरिट आधार पर हुए हैं। निजी कॉलेजों से आ रही सूचनाओं के अनुसार छात्र निजी कॉलेजों में दाखिला लेने कम संख्या में आ रहे हैं। जिले में कुछ ही निजी कॉलेजों में छात्र दाखिला लेना पसंद करते हैं।
ये बताई जा रही है वजह
रूहेलखंड टीचर्स एसोसिएशन रूटा के अध्यक्ष डॉ. मुकेश कुमार ने बताया कि छात्रों एवं अभिभावकों का स्किल डेवलपमेंट पर ध्यान केंद्रित है। छात्र इंटर करने के बाद तकनीकी शिक्षा में दाखिले को प्राथमिकता दे रहे हैं। कोरोना ने तकनीकी शिक्षा इंजीनियरिंग आदि में गैर राज्यों में दाखिला लेने पर लगाम लगा दी है। अभिभावक बच्चों के स्वास्थ्य को देखते हुए पढ़ाई को बाहर नहीं भेजना चाहते हैं। इसलिए छात्रों ने पालीटेक्निक, आईटीआई जैसे तकनीकी संस्थानों में दाखिले के लिए रुख कर लिया है। वहीं, शिक्षाविदों के अनुसार निजी कॉलेजों में बड़ी संख्या में कक्षा सेक्शन का बढ़ जाना भी कम दाखिला होने की एक वजह है। अभिभावकों जितेंद्र कुमार, डीके सिंह, अलका रानी का तर्क है कि निजी कॉलेजों में फीस बहुत अधिक है। अभिभावक भी नौकरी की संभावना सुनिश्चित करने को आईटीआई आदि में दाखिला कराना ज्यादा पसंद कर रहा है।