बिजनौर के कस्बा झालू में गोशाला में भूसा खाती गाय।
- फोटो : BIJNOR
गोवंश को हरे चारे की जगह दिया जा रहा भूसा
बिजनौर। नगर पंचायत झालू में गायों को खिलाने के लिए भेजे गए चारे के बिल को चेयरमैन ने मंजूर करने से मना कर दिया। गायों को करीब दस दिन से भूसा दिया जा रहा है। गोशाला में गायों को भूसा देने के मामले की जांच बैठा दी गई है। एडीएम प्रशासन विनोद कुमार गौड़ ने इस मामले की जांच रिपोर्ट तलब की है।
निराश्रित गोवंश के भरण पोषण के लिए नगर पंचायतों में गोशाला बनाई गई हैं। झालू नगर पंचायत में बनी गोशाला में इस समय 81 पशु हैं। गोशाला की गायों के भरण पोषण के लिए पशुपालन विभाग की ओर से 30 रुपये प्रति गोवंश रोज दिए जाते हैं। इसके अलावा भी चोकर, चारे आदि के लिए नगर पालिकाएं खुद भी अपने स्तर से व्यय करती है। झालू नगर पंचायत में बोर्ड के सदस्यों का आपस में विवाद चल रहा है। अभी तक बोर्ड का बजट भी पास नहीं किया गया है। नगर पालिका के कर्मचारियों ने गोवंश का करीब डेढ़ महीने का दो लाख रुपये का बिल चेयरमैन शहजाद अहमद के पास हस्तारक्षर के लिए भेजा। इस बिल का पैसा चेयरमैन के हस्ताक्षर के बाद ही जारी होता है। लेकिन चेयरमैन ने बिल को बहुत ज्यादा बताते हुए उस पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। इससे गोवंश केे लिए हरा चारा खरीदने का रास्ता भी बंद हो गया। 24 अगस्त से गोवंश को भूसा दिया जा रहा है। जबकि शासन द्वारा गोवंश को हरे चारे के साथ मिनरल मिक्सचर तक देने का प्रावधान है। गोवंश को भूसा दिए जाने को प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। प्रशासन द्वारा इस मामले में जांच बैठा दी गई है। हालांकि अब गोवंश को भूसे के साथ चोकर दिया जा रहा है।
इतने चारे की जरूरत
एक व्यस्क पशु को एक दिन में करीब 20 किलो भूसे व पांच से दस किलो हरे चारे की जरूरत पड़ती है। भूसे को पशु ज्यादा चाव से नहीं खाते हैं। अगर पशु को लंबे समय तक हरा चारा न दिया जाए तो वह निगेटिव एनर्जी का शिकार हो जाता है। भूसे से पशु को पोषक तत्व नहीं मिलते हैं और उसके अंदर पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। पशु कमजोर हो जाते हैं।