बिजनौर में प्रेम के प्रतीक और राज्य पक्षी सारस को राजा दुष्यंत व शकुंतला की प्रेम स्थली खूब भा रही है। गत छह माह में ही बिजनौर जिले में सारसों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है। सारस के बढ़ते कुनबे को देखकर वन्य अधिकारी व पक्षी प्रेमियों में हर्ष है।
वन विभाग ने शासन के निर्देश पर जून 2015 में सारस की गणना की थी। तब बिजनौर सामाजिक वानिकी की छह रेंजों में व नजीबाबाद सामाजिक वानिकी में सभी की पांच रेंजों में कुल 119 सारस मिले थे। पुन: 14 व 15 दिसंबर को सारस की गणना के निर्देश दिए थे।
इस दौरान वनकर्मियों को जिले भर में 128 सारस दिखाई दिए। सारस की बढ़ी संख्या देख अधिकारियों की खुशी का ठिकाना नहीं है। पक्षी विशेषज्ञों के मुताबिक सारस जोड़े में रहते हैं तथा अपने साथी से अथाह स्नेह करते हैं। सारस का बच्चा बड़ा होने पर स्वयं अपने साथी की तलाश कर जोड़ा बना लेता है। यदि किसी कारणवश जोड़े में से एक साथी मर जाता है तो दूसरा साथी भी उसे वियोग में अपने प्राण तोड़ देता है।
सारस को साहनपुर और बढ़ापुर रेंज नहीं भाए
नजीबाबाद सामाजिक वानिकी में सारस की गणना की गई। गणना में साहनपुर रेंज व बढ़ापुर रेंज में सारस की संख्या शून्य मिली है। दोनों रेंज में एक भी सारस का न दिखाई देना चिंता का विषय है। दोनों रेंजों की स्थिति को लेकर अधिकारी भौचक्के हैं। इससे पूर्व जून, दिसंबर 2014 व जून 2015 में हुई गणना में इन दोनों रेंजों में एक भी सारस नहीं दिखाई दिया।
डीएफओ सलील कुमार शुक्ला का कहना है कि बिजनौर जिले का वन क्षेत्र शांत तथा पशु पक्षियों के रहने योग्य उचित स्थान है। सारस की संख्या बढ़ना सभी वन कर्मियों के लिए खुशी की बात है।