राजकीय बकाएदारी प्रधानों के उम्मीदवारी में बनेगी बाधा
बिजनौर। ग्राम पंचायतों का कार्यकाल दस दिन बाद समाप्त हो जाएगा। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारी शुरू हो गई हैं। कुछ मौजूदा प्रधानों ने भी दोबारा चुनाव में उतरने के लिए बिसात बिछानी शुरू कर दी है। परंतु किसी भी तरह की राजकीय बकाएदारी इन प्रधानों के चुनाव लड़ने के रास्ते में बाधा बन सकती हैं। प्रशासन विभिन्न विभाग से आने वाली बकाएदार प्रधानों की सूची के इंतजार में हैं।
जिले में 1128 ग्राम पंचायत हैं। वर्ष 2015 में पंचायतों की पहली बैठक 24 दिसंबर को हुई थी। इस प्रकार पंचायतराज अधिनियम के अनुसार 24 दिसंबर 2020 को मौजूदा प्रधानों का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा। सूबे में पंचायत चुनाव की तैयारी भी शुरू हो गई है। मतदाता सूची पुनरीक्षण का काम काम चल रहा है। पंचायतों का आंशिक परिसीमन शुरू हो गया है। शासन ने आरक्षण के लिए जिलों से ब्लॉकवार, पंचायतवार, अति पिछड़ा वर्ग, एससी, सामान्य जाति के आंकड़े भी मांगे हैं।
शासन स्तर पर पंचायत चुनाव की सुगबुगाहट तेज देख संभावित दावेदारों ने सक्रियता बढ़ा दी है । ये लोग पंचायत चुनाव दफ्तर से पुरानी मतदाता सूची समेत अन्य जानकारी लेने आ रहे हैं। कुछ मौजूदा प्रधान भी आगामी चुनाव की ताल ठोकने की तैयारी में हैं। परंतु किसी भी तरह की राजकीय बकाएदारी प्रधानों को चुनाव लड़ने से रोक सकती है।
पंचायत के चुनाव में लगी आपत्ति का निस्तारण भी चुनाव से पूर्व कराया आवश्यक होगा। आडिट आपत्ति के निस्तारण हुए बिना अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं मिल सकेगा।
- ये बकाएदार प्रधान हो सकते हैं चुनाव से अयोग्य
प्रधान पर किसी भी तरह की राजकीय बकाएदारी है तो वह चुनाव नहीं लड़ सकता। डीपीआरओ सतीश कुमार ने बताया कि ग्राम पंचायत में जांच में अनियमितता मिली हैं तथा प्रधान से शासकीय नुकसान की भरपाई को वसूलयाबी के आदेश हैं तो प्रधान द्वारा पैसा जमा नहीं करने पर वह चुनाव लड़ने से अयोग्य होगा। कहा कि जिले में बकाया बसूलयाबी का ऐसा कोई मामला नहीं है।
तहसीलदार प्रीति सिंह ने बताया कि प्रधान के खिलाफ ग्राम पंचायत की संपत्ति पर अवैध कब्जे या बैंक आदि की शासकीय वसूलयाबी के लिए कोई आरसी जारी हुई है तो वह चुनाव नहीं लड़ सकता है। कहा कि तहसील को अभी विभागों से बकाया की कोई सूचना नहीं है।
बड़ी संख्या में जांच हैं लंबित
बिजनौर। पंचायत चुनावों के नजदीक आते ही प्रधानों के खिलाफ शिकायतों की झड़ी लगी है। प्रशासन की टीम जांच करने में लगी हैं। सूत्रों के अनुसार अभी भी सैकड़ों शिकायत की जांच लंबित हैं। जांच टीम की रिपोर्ट नहीं आने से शिकायतों का निस्तारण नहीं हुआ है। डीएम की ओर से जांच जल्द पूरी करने के लिए पत्र भेजे गए हैं।
एनओसी के बिना नहीं लड़ सकते चुनाव
बिजनौर। पंचायतराज विभाग से मिली जानकारी के अनुसार मौजूदा ग्राम प्रधानों को चुनाव लड़ने के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र अर्थात एनओसी लेना अनिवार्य है। डिफाल्टर चुनाव नहीं लड़ सकता है। इसलिए पंचायतों की शिकायतों को जल्द निपटाने के प्रयास हैं।