बिजनौर। हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को प्रेरणा मानकर जिले के खिलाड़ियों ने भी हॉकी में खूब नाम कमाया। कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। मेजर ध्यानचंद के बेटे वीरेंद्र कुमार बिजनौर के मोहल्ला काजीपाड़ा में रहने वाले खालिद असरार की कप्तानी में यूपी टीम में खेले। मगर मेजर ध्यानचंद के बाद से बिजनौर की हॉकी में आया खालीपन आज भी बढ़ ही रहा है।
जिले में 70 के दशक में हॉकी का खुमार चरम पर था। गली-गली में हॉकी खेली जाती थी। प्रमुख क्लब ऑफीशियल स्पोर्ट्स क्लब, नेशनल क्लब, फ्रेंड्स क्लब, व्हाइट विक्टोरिया क्लब के अलावा गली मोहल्लों के क्लब तक हॉकी को प्रमोट करते थे। साल भर हॉकी प्रतियोगिताएं होती थीं।
नेशनल टीम में प्रवीण कुमार ने जगह बनाई तो रजिया जैदी ने छह साल तक महिला टीम की कप्तानी की। जिले के झुम्मनलाल शर्मा, राजेश्वर प्रसाद विश्नोई, महेंद्रनाथ खन्ना, सुरेंद्रनाथ खन्ना, वीके त्यागी, खालिद असरार ने यूपी टीम से खेलते हुए नेशनल स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लिया।
प्रतिभाओं का आलम ये था कि मेजर ध्यानचंद के बेटे वीरेंद्र कुमार ने साल 1979 में दिल्ली में हुई ऑल इंडिया हॉकी नेहरू कप में बिजनौर के मोहल्ला काजीपाड़ा निवासी खालिद असरार की कप्तानी में प्रतियोगिता में भाग लिया था। मगर अब सालों से कोई भी खिलाड़ी यूपी की टीम में भी जगह नहीं बना पाया है।
खिलाड़ी खालिद असरार कहते हैं कि हॉकी का वो दौर ही कुछ और था। हॉकी एक जुनून की तरह थी। अब तो युवाओं को ये भी नहीं पता होगा कि हॉकी में एक टीम में कितने खिलाड़ी होते हैं। मेजर ध्यानचंद का स्वर्णिम इतिहास बताकर ही शायद युवाओं को फिर से इस खेल से जोड़ा जा सकता है।