नजीबाबाद। वन निगम की साल की लकड़ी से भरी ट्रैक्टर ट्रॉली सामाजिक वानिकी के रेंजर ने पकड़ी। जिस निकासी रवन्ने से ट्रॉली की निकासी हो रही थी उसे भी गलत मानते हुए डीएफओ को जांच सौंपी गई है।
उप्र वन निगम के कार्यालय द्वारा साहूवाला रेंज के कंपार्टमेंट नंबर 12 से साल की लकड़ी से भरी ट्रैक्टर-ट्राॅली द्वारा ले जाई जा रही थी। सामाजिक वानिकी विभाग के रेंजर प्रदीप शर्मा ने नगीना क्षेत्र में छह अप्रैल को रात्रि करीब 10:30 बजे ट्रॉली को पकड़ा। रवन्ने पर ओवर राइटिंग के साथ सात अप्रैल की तिथि पड़ी होने, अनधिकृत रूप से रात में निकासी पर रेंजर ने ट्रॉली को अपने कब्जे में ले लिया।
ट्रॉली में साहूवाला से वन निगम के जाफराबाद डिपो ले जाए जा रहे साल की कीमती लकड़ी के 56 नग भरे हुए थे। सामाजिक वानिकी रेंजर प्रदीप शर्मा ने प्रभागीय वनाधिकारी ज्ञान सिंह और उच्चाधिकारियों को सूचना दी।
वन संरक्षक मुरादाबाद के संज्ञान में मामला आने के बाद मामले की जांच डीएफओ नजीबाबाद वंदना को सौंपी गई है। वन विभाग के एसडीओ राजीव कुमार ने टीम के साथ मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। जांच में बड़ा मुद्दा निकासी रवन्ने और निकासी समय को लेकर है। साल की लकड़ी जंगल से काटना प्रतिबंधित है, तो ट्रैक्टर ट्राॅली में पकड़ी गई लकड़ी कौन सी है। वन रेंज के किस क्षेत्र से वृक्षों का कटान हुआ। रात को निकासी क्यों की जा रही थी, यह सब जांच का विषय है।
- प्रतिबंधित है साल का कटान और छपान
जंगल से साल के वृक्षों का कटान और छपान प्रतिबंधित है। वन निगम रात को जिस निकासी रवन्ने से साल की लकड़ी की निकासी कर रहा था, प्रथम दृष्टया वह रवन्ना जांच के दायरे में है। छह अप्रैल को रात में ट्राॅली पकड़ी गई। रवन्ने पर छह और सात तिथि को ओवर राइटिंग कर सात अप्रैल 2024 अंकित है। रात में किसी भी प्रकार की निकासी प्रतिबंधित है, उस पर एडवांस तारीख और कटिंग पर हस्ताक्षर न होना भी जांच का विषय है।
- वन निगम के प्रभागीय लौगिंग प्रबंधक शिव कुमार मीणा का कहना है। वन विभाग द्वारा सूखे-उखाड़े साल की वृक्षों को छपान के लिए निगम को स्वीकृति दी गई थी। सब कुछ नियमानुसार हुआ है। कर्मचारी की लापरवाही से तिथि में गड़बड़ी हुई है। जांच में साफ हो जाएगा।
वन विभाग का दावा
वन विभाग के एसडीओ राजीव कुमार का कहना है कि वन क्षेत्र के सूखे, उखड़े, गिरे-पड़े वृक्षों के कटान और छपान की जिम्मेदारी नियमानुसार वन निगम को सौंपी जाती है। हरे-भरे वृक्षों का काटन पूरी तरह प्रतिबंधित है।
साहूवाला रेंज में साल की लकड़ी से संबंधित मामले की जांच कई बिंदुओं पर कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। - वंदना, डीएफओ, नजीबाबाद।