बिजनौर, धामपुर। खंडसारी इकाइयां एक-एक कर हर साल दम तोड़ती जा रही है। पिछले साल की तुलना में इस बार भी गन्ना क्रशरों के संचालन में इजाफा नहीं हुआ। धामपुर और चांदपुर तहसील क्षेत्र में 142 लोगों के पास क्रशरों के लाइसेंस हैं। इस बार अभी तक केवल 18 ही इकाइयां चल पाई हैं। पिछले साल 20 का संचालन हुआ था।
विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उनके स्तर इकाइयों के संचालन की संख्या बढ़ाने के लिए पूरा प्रयास किया जा रहा है। लेकिन सफलता नहीं मिल रही। लाइसेंस धारक इकाइयों को चालू करने की हिम्मत नहीं कर पा रहा है। लाइसेंस धारक कृष्ण कुमार सिंह, नरेंद्र कुमार, भीम सिंह आदि का कहना है कि इकाइयों को चलाना अब कोई समझदारी नहीं है। चीनी मिलों ने गन्ना क्रशरों की जगह ले ली है। ऐसे में खांडसारी इकाइयों का अस्तित्व को बचा पाना बहुत टेढ़ी खीर है। जिले में वर्तमान में नौ चीनी मिलें संचालित हो रहीं हैं। सैकड़ों की संख्या में गन्ना कोल्हू चल रहे हैं।
गन्ने का क्षेत्रफल हर साल घटता जा रहा है। खेती की जमीन पर काॅलोनियां कटने से कृषि क्षेत्रफल भी घट रहा है। ऐसे में खान सारी इकाइयों को चलाना कोई समझदारी नहीं है। चीनी मिलों के बराबर भाव देने पर भी पर्याप्त गणना नहीं मिलता। इतना ही नहीं सरकार के भी अनदेखी खांडसारी इकाइयों पर भारी पड़ रही है। सरकार खान सारी इकाइयों की तरफ कम और चीनी मिलों की तरफ ज्यादा ध्यान दे रही है।
धामपुर सहायक चीनी आयुक्त क्षेत्र में धामपुर चांदपुर तहसील शामिल है। दोनों तहसीलों में करीब 142 लोगों के पास क्रशरों के लाइसेंस है। पिछले साल 20 चले थे। अबकी बार अभी तक 18 ही चल पाए हैं।
- इकाइयों को चालू कराने का किया जा रहा प्रयास
खांडसारी इंस्पेक्टर सीता शुक्ला का कहना है कि विभाग स्तर से और खंड सारी इकाइयों को चालू करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। सरकार की क्रशर प्रोत्साहन योजना के बारे जानकारी दी जा रही है। अभी तक चल रहे 18 क्रशरों के माध्यम से तीन लाख क्विंटल गन्ने की ही खरीद हो सकी है।