नगीना/बिजनौर। काष्ठ कला नगरी के रूप में पहचान बनाने वाला नगीना इस बार जीत का सेहरा किस पार्टी के प्रत्याशी के सिर बांधेगा इसका पता तो 4 जून को चुनाव परिणाम के दिन पता चलेगा लेकिन इस सीट के रोजाना बदल रहे समीकरण सभी पार्टी के नेताओं को जरूर परेशान कर रहे हैं। इस लोकसभा क्षेत्र के मतदाताओं का मिजाज भांप पाना किसी भी पार्टी के लिए आसान नहीं रहा। एक बड़ी आबादी मुखर है, जो साफ-साफ अपना रुख बता रही है, लेकिन जो खामोश है उनकी संख्या भी कम नहीं है। यही वजह है कि कोई भी राजनीतिक पंडित किसी भी पार्टी की स्थिति कमजोर या मजबूत होने का आकलन अभी नहीं कर पा रहा है।
नगीना लोकसभा सीट के छोटे से इतिहास को यदि खंगाले तो इस सीट पर हमेशा त्रिकोणीय मुकाबला ही नजर आया। लेकिन इस बार के हालात पिछले बार से कुछ इतर हैं। इस बार भाजपा-सपा- बसपा के अलावा आजाद समाज पार्टी पहली बार चुनावी मैदान में है।जिसके चलते इस सीट का चुनाव त्रिकोणीय के बजाय चतुष्कोणीय बन गया है। नगीना लोकसभा सीट में इस बार 16,38,329 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
नगीना की चुनावी पिच पर भाजपा ने अपने तीन बार के विजेता विधायक ओम कुमार, सपा ने पूर्व अपर जिला जज मनोज कुमार, बसपा ने सुरेंद्र पाल सिंह मैदान में उतारा है जबकि आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद स्वयं ही मैदान में हैं। इस लोकसभा सीट पर सर्वाधिक मतदाता मुस्लिम व दलित समाज से हैं। चुनाव परिणाम भी इन दोनों के रुख पर हमेशा निर्भर करता आया है। एक तरफ जहां बसपा, सपा व आजाद समाज पार्टी इन दोनों समाज के वोटों को एकजुटता से अपने-अपने पक्ष में करने में लगी है, वहीं भाजपा इन दोनों वोटों के बंटवारे पर ही अपनी आस लगाए बैठी है।
इसके अलावा सभी पार्टियों के प्रत्याशी एक-दूसरे के वोट बैंक में सेंधमारी करने में लगे हुए हैं, जिसके चलते नगीना सीट के समीकरण रोजाना बदल रहे हैं। सभी पार्टियों के प्रत्याशियों के बड़े नेताओं की रैलियों व जनसंपर्क कार्यक्रमों में लोगों की आ रही भीड़ चुनावी गुणा-भाग करने वाले लोगों को भी गड़बड़ा रही है। इस सीट पर अपनी पार्टी प्रत्याशी को जीत दिलाने के लिए जहां सभी पार्टियों के दिग्गज नेताओं की कई-कई रैली हो चुकी है। वहीं आजाद समाज पार्टी के प्रत्याशी चंद्रशेखर आजाद अपनी पार्टी के लिए खुद ही स्टार प्रचारक बने हुए हैं। एक तरफ जहां भाजपा मुस्लिम महिलाओं व दलित वोट में सेंधमारी के साथ-साथ मुस्लिम वोटों के बंटवारे पर अपनी जीत की उम्मीद लगाए बैठी है। वहीं सपा-बसपा व आजाद समाज पार्टी के प्रत्याशी दलित-मुस्लिम गठजोड़ व भाजपा के मूल वोट बैंक में सेंधमारी के सहारे अपनी-अपनी जीत का सपना देख रहे हैं।
नगीना लोकसभा सीट के चुनावी रण में जहां भाजपा ने स्थानीय बनाम बाहरी के मुद्दे को प्रमुखता से उछाल रखा है। वहीं विपक्षी पार्टियों ने लोकतंत्र व संविधान बचाओ के नारे को हवा दे रखी है। अब देखना दिलचस्प होगा कि नगीना का मतदाता किस पार्टी की बात पर विश्वास जताता है।
- जमकर हो रहीं रैलियां
पहले चरण की नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद नगीना लोकसभा क्षेत्र में विभिन्न पार्टियों में रहकर वर्षों से राजनीति करने वाले तमाम नेताओं का पाला बदलने से चुनाव के रोज समीकरण बदल रहा है। पिछली 10 दिनों में विभिन्न पार्टियों के कई दिग्गज नेताओं व कई पूर्व जनप्रतिनिधियों ने अपनी-अपनी पार्टी से किनारा कर नया ठिकाना पकड़ लिया है। नेताओं के पाला बदलने से भी रोजाना सभी दलों के प्रत्याशियों की स्थिति भी अदल- बदल रही है।
- नगीना लोकसभा की पांचों विधानसभा में 163832 मतदाता शामिल हैं।
विधानसभा - पुरुष - महिलाएं - अन्य - कुल मतदाता
-नजीबाबाद - 186699 - 165469 - 19 - 352187
- नगीना (अ0जा0) - 185663 - 164416 - 12 - 350091
- धामपुर - 161460 - 142520 - 18 - 303998
- नहटौर (अ0जा0) - 162497 - 144680 - 4 - 307181
- नूरपुर - 172951 - 151912 - 9 - 324872
कुल - 869270 - 808061 - 62 - 1638329