- कागजों में चल रही रेशम उत्पादन योजना, धरातल पर परिणाम शून्य
फोटो - 03एनजेडबी02ए से 02ई तक
एजाज अहमद
नजीबाबाद। रेशम विकास विभाग के अधिकारियों की उदासीनता से रेशम उत्पादन परियोजना औपचारिक बनकर रह गई है। फरवरी-मार्च माह में रेशम कीट पालन का उत्तम समय है। तहसील के रेशम कीट पालन केंद्रों पर उपकरण धूल फांक रहे हैं।
तहसील के बरमपुर, बुडगरा, सुंगरपुर बेहड़ा और जट्टीवाला केंद्रों पर रेशम कीट पालन किया जाता है। बुडगरा और बरमपुर में 36-36 एकड़ भूमि पर रेशम कीट योजना के शहतूत फार्म विकसित हैं। जबकि सुंगरपुर बेहड़ा और जट्टीवाला में लगभग सात से आठ एकड़ के शहतूत फार्म हैं। रेशम विकास विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की उदासीनता से क्षेत्र की रेशम कीट पालन योजना कागजों तक सीमित होकर रह गई है।
योजना का मुख्य केंद्र बुडगरा और बरमपुर हैं। बुडगरा और बरमपुर दोनों केंद्रों पर वर्तमान में रेशम उत्पादन संबंधी उपकरण धूल फांक रहे हैं। केंद्र के अनुरक्षक छतरपाल सिंह का कहना है कि वह एक माह से अवकाश पर हैं। उन्होंने केंद्र पर समय-समय पर कीट पालन का दावा किया। बुडगरा निवासी जयपाल सिंह का कहना है कि बुडगरा रेशम कीट फार्म पर कभी-कभी कर्मचारी और मजदूर देखे जाते हैं। सरकार को इस योजना को बंद कर फार्म पर पशु पालन और चारा विकास योजना शुरू करानी चाहिए।
70 वर्षीय किसान रामपाल सिंह का कहना है कि रेशम उत्पादन और रेशम कीट पालन के संबंध में क्षेत्र में बहुत कम लोगों को जानकारी है। अधिकारियों की उदासीन के कारण क्षेत्रवासियों को न तो रोजगार मिल पा रहा है और न ही रेशम उत्पादन योजना का लाभ मिल रहा है।
रेशम उत्पादन और कीट पालन के नियमानुसार काम के लिए अनुरक्षकों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। समय-समय पर कीट पालन किया जाता है। वर्तमान स्थिति के संबंध में तत्काल जांच कराकर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी - जेपी अनुरागी, सहायक निदेशक रेशम विकास।