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चहुंओर गूंजेंगी शहनाइयां, होंगी सैकड़ों शादियां

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चहुंओर गूंजेंगी शहनाइयां, होंगी सैकड़ों शादियां
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बिजनौर । देव उत्थान एकादशी पर शहनाई गूंजनी शुरू हो जाएंगी। इसी पर्वकाल में तुलसी सालिग्राम विवाह हुआ था, इसे पर्वकाल या अबूझ नक्षत्र भी कहा जाता है। इसलिए इस तिथि में विवाह बंधन में बंधने वाले जोड़ों के लिए यह दिन सर्वश्रेष्ठ होता है। जिले में देव उत्थान एकादशी पर सैकड़ों शादियां होंगी। इसके लिए पंडित जी, बैंड वाले, बैंकट हॉल, फोटो- वीडियो वाले आदि विवाह पार्टी कई माह पहले से ही बुक हो चुके हैं। आठ नवंबर के बाद 16 नवंबर से 12 दिसंबर तक सहालग रहेगी।
हिंदू धर्म में देव उत्थान एकादशी का बड़ा ही महत्व है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को यह त्योहार मनाया जाता है। इस बार यह शुक्रवार यानी आठ नवंबर को है। इस दिन भगवान विष्णु और लक्ष्मी के साथ तुलसी की पूजा करने का भी विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देव उत्थान एकादशी के दिन श्री हरि चार महीने के शयनकाल के बाद जाग जाते हैं। डबराल ज्योतिष सदन प्रभारी पंडित प्रभुदत्त डबराल बताते हैं कि इस बार एकादशी तिथि सात नवंबर की सुबह 9:55 बजे से शुरू होकर आठ नवंबर 2019 को रात 12:24 बजे तक रहेगी। चूंकि हिंदू धर्म में सूर्योदय में हुई तिथि वाला त्यौहार मनाना ही कल्याणकारी होता है, इसलिए इस बार यह त्यौहार आठ नवंबर को मनाया जाएगा।
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- बैंक्वेट हॉलों की एडवांस बुकिंग
जिले में करीब 250 बैंकट हॉल हैं। लगभग 45 बैंकट हॉल जिला मुख्यालय पर स्थित हैं। एकादशी तिथि के लिए करीब करीब सभी की बुकिंग हो चुकी है। शहनाई बैंकट हॉल के स्वामी राजकुमार अग्रवाल तथा स्वयंवर बैंकट हॉल के मालिक विनीत कुमार अग्रवाल उर्फ लालू ने बताया कि लगभग सभी बैंकट हॉल कई माह पहले से ही बुक हो चुके हैं। किरन उत्सव मंडप के स्वामी सुनील कुमार गोयल के अनुसार उनके बैंकट हॉल करीब एक माह पहले ही बुक हो चुका है। बिजनौर स्थित शर्मा बैंड के स्वामी महफूज उर्फ बुली का कहना है कि पूरे जिले में लगभग 1200 बैंड हैं। इनकी दिन की अपेक्षा रात में बुकिंग हो चुकी है। प्रजापति चित्रशाला के स्वामी कमल कुमार ने बताया कि एकादशी पर उनके पास दिन और रात दोनों में शादियों का ऑर्डर है।
- विशेष फलदायी होती है यह तिथि
ज्योतिष आचार्यों का कहना है कि एकादशी तिथि दांपत्य जीवन में बंधने वाले जोड़ों के लिए विशेष फलदायी होती है। पंडित प्रभुदत्त डबराल और आदेश शर्मा बताते हैं कि देव उत्थान एकादशी को प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन परंपरा के अनुसार तुलसी-सालिग्राम विवाह भी किया जाता है। विवाह संस्कार के समय उत्तरा भाद्रपद आ जाएगा, जो नवयुगलों के लिए सर्वश्रेष्ठ रहेगा।
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- ऐसे करें एकादशी पर पूजन
पंडित सूर्यदीप शर्मा उर्फ पम्मी ने बताया कि इस दिन पूजा स्थल को साफ करके सायंकाल में वहां पर चूना और गेरु से रंगोली बनाएं। साथ ही घी के 11 दीपक जलाने से सभी मनोकामना सिद्ध होती हैं। इसके अलावा द्राक्ष, ईख, अनार, केला, सिंघाड़ा, लड्डू, बतासे, मूली आदि ऋतुफल इत्यादि पूजा सामग्री के साथ ही प्रभु को अर्पण करनी चाहिए। यह सब श्रद्धापूर्वक श्री हरि को अर्पण करने से साधक पर श्री हरी की कृपा सदैव बनी रहती है।
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