शीरा लेवी : बिलाई मिल के प्रस्ताव पर गन्ना विभाग की आपत्ति
बिजनौर। बिलाई चीनी मिल पूरे ग्रुप के शीरे की लेवी अपनी मिल से ही देना चाहती है। इससे शीरा बेचकर मिलने वाली रकम से किसानों का भुगतान नाममात्र का होगा। गन्ना विभाग ने मिल के इस प्रयास पर आपत्ति लगा दी है। इस संबंध में शासन को पत्र लिखा गया है। साथ ही पिछले पेराई सत्र का शीरा व चीनी बेचकर भुगतान न करने पर भी कार्रवाई के लिए सहायक चीनी आयुक्त को लिखा गया है। इस पत्र पर कार्रवाई अभी लंबित है।
शीरे का मूल्य इस समय करीब 500 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है। मिलों को कुल शीरा उत्पादन का 18 प्रतिशत शीरा 100 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से मिलों को बेचना पड़ता है। बाकी शीरे को मिलें अपनी मर्जी के मूल्य पर बेचने को स्वतंत्र रहती हैं। शीरा बेचकर जो पैसा मिलता है उसके 85 प्रतिशत हिस्से से किसानों का भुगतान किया जाता है। बजाज ग्रुप की करीब 16 चीनी मिल हैं। बिलाई भी इसी ग्रुप की मिल है। मिल द्वारा पिछले साल अपना शीरा डायवर्ट करने के नाम पर दूसरी मिलों को भेजकर बेच दिया गया था। इस तरह करीब 27.56 करोड़ का शीरा और चीनी बेची गई थी, जिसका किसानों को भुगतान नहीं दिया गया। जबकि मिल पर पिछले साल का करीब 36.49 करोड़ का बकाया है।
चीनी और शीरा बेचकर मिली सभी राशि से भुगतान किया जाता तो मिल पर नाम मात्र का बकाया रहता है। अब मिल ने शासनादेशों का हवाला देते हुए गन्ना विभाग से ग्रुप की सभी मिलों की लेवी अपने यहां से ही देने के लिए पत्र लिखा है। ऐसा होता है तो केवल छह मिलों की लेवी में ही मिल का शीरा खत्म हो जाएगा। इससे किसानों का भुगतान लटकेगा। गन्ना विभाग ने मिल के प्रयास पर विरोध जता दिया है। ग्रुप की सभी मिलों की लेवी देने से रोकने के लिए विभाग ने शासन को पत्र लिखा है। शासन से मिल से उसकी ही लेवी लेने को कहा गया है।
लेवी से ये होगा नुकसान
अगर मिल एक क्विंटल शीरा लेवी में देगी तो उस पर 100 रुपये मिलेंगे। इसमें से 85 रुपये किसानों के भुगतान में जाएंगे। यही शीरा मिल 500 रुपये के रेट में बेचती है तो इस पर भुगतान के लिए मिल को 425 रुपये मिलेंगे। जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह के अनुसार बिलाई मिल की ओर से पूरे ग्रुप की शीरे की लेवी देने से किसानों का भुगतान प्रभावित होगा। इस संबंध में शासन को पत्र लिखा गया है। बिलाई चीनी मिल के गन्ना महाप्रबंधक परोपकार सिंह के अनुसार गन्ना आयुक्त के निर्देश के अनुसार ही ग्रुप का शीरा बिलाई मिल से देने की बात कही गई है। किसानों का गन्ना भुगतान लगातार किया जा रहा है।
यह होती है लेवी
बिजनौर। लेवी एक तरह से सरकार के लिए निर्धारित कोटा होता है। सरकार मिलों से चीनी और शीरे का कोटा लेती है। इस कोटे को जनता को कम कीमत पर बांटा जाता है या सरकार अपने कार्यों में खर्च करती है। इसलिए चीनी मिलों से भी चीनी या शीरे को लेवी के रूप में कम कीमत पर लिया जाता है।