संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। प्रसिद्ध शायर नवाज़ देवबंदी ने कहा कि शायरी और कविता लोगों को जोड़ने का काम करती हैं। उन्होंने हिंदी और उर्दू अकादमी की स्थापना भी की है।
प्रसिद्ध शायर नवाज़ देवबंदी किरतपुर में एक कार्यक्रम में भाग लेने आए थे। इस दौरान उन्होंने अमर उजाला से खास बातचीत की। नवाज देवबंदी ने कहा कि आजकल मंचों पर बहुत बदलाव आया है। मंच की परंपरा कमजोर हुई है। शायरी और कविता के नाम पर कई बार फूहड़ता नजर आने लगी है। कवियों और शायरों को आगे आकर नई पीढ़ी को प्रेम और भाईचारे की सीख देनी चाहिए।
भाषा करती है सेतु का काम
नवाज़ देवबंदी ने कहा कि भाषा सेतु का काम करती है। आज उर्दू और हिंदी को अलग-अलग देखा जा रहा है जबकि दोनों एक ही जबान हैं। देश में हिंदी अकादमी और उर्दू अकादमी की स्थापना की गई है। इसमें दोनों ही भाषाओं को साथ लेकर चलने का काम किया जा रहा है।
रील मनोरंजन का माध्यम
नवाज़ देवबंदी ने कहा कि आजकल सोशल मीडिया का जमाना है और जमकर रील बन रही है। रील मनोरंजन का साधन है। रील को लोग सुनकर आनंद देते हैं, लेकिन लंबे समय तक याद नहीं रखते।
कविता और शायरी देती है मोहब्बत का पैगाम
नवाज़ देवबंदी ने कहा की कविता और शायरी मोहब्बत का पैगाम देती हैं। कई बार कवि और शायरों की विचारधाराएं विपरीत होती हैं, लेकिन कविता सुनने वाले का धर्म कविता ही हो जाता है।