बिजनौर के नजीबाबाद में उलेमा ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ में दखलंदाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जामा मस्जिद में हुई उलेमा और आम नागरिकों की सभा में यह बात कही गई। हस्ताक्षर अभियान चलाकर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और राष्ट्रपति को इस संबंध में ज्ञापन भेजने का भी निर्णय लिया गया।
जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना मो.ईसा की उपस्थिति में हुई सभा में केंद्र सरकार पर मुस्लिमों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया गया। मौलाना मो.ईसा ने दो टूक कहा कि देश में मुस्लिम पर्सनल लॉ और शरीयत में दखलंदाजी का राजनीतिक षड्यंत्र बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संविधान में हर धर्म से जुड़ी स्वतंत्रता है। शरीयत के कानून और पर्सनल लॉ बोर्ड में किसी बदलाव की कतई गुंजाइश नहीं है। उन्होंने कहा कि हर कीमत चुकाकर शरीयत के कानून की हिफाजत की जाएगी। मौलाना गुफरान के संचालन में आयोजित मीटिंग में मुफ्ती असरार, मौलाना असलम कासमी, मौलाना सलीम, हाफिज रईस, चेयरमैन मौअज्जम खां, रफीक अंसारी, शेख मो.आबिद, तसलीम सिद्दीकी, इंजी.मुअज्जम खां, खुर्शीद आलम ने तीन तलाक मामले में केंद्र सरकार के रवैये पर अफसोस जाहिर किया। वक्ताओं ने कहा कि मुल्क और शरीयत की हिफाजत करना हमारी जिम्मेदारी है।