शहीद-ए-करबला इमाम हुसैन को याद किया
बिजनौर। शहीद-ए-करबला इमाम हुसैन के चालीसवें की मजलिस बुखारा स्थित इमामबाड़ा में आयोजित हुई। इसके अलावा शहर में मातमी जुलूस निकाला गया। मजलिस को मौलाना कमाल ताहिर ने खिताब किया। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन की शहादत दुनिया से जुल्मों को समाप्त करने और मानवता की स्थापना करने के लिए थी।
रविवार को बुखारा स्थित इमामबाड़ा में आयोजित मजलिस में मौलाना कमाल ताहिर ने कहा कि इमाम हुसैन की कुर्बानी का मकसद स्वच्छ समाज की स्थापना करना था। जिस समाज में हर इंसान बिना खौफ और दहशत के खुली हवा में सांस ले सके। इमाम हुसैन जालिम यजीद की ताकतवर हुकूमत के आगे नहीं झुके। मजलिस के बाद दुल दता घोड़ा बरामद किया गया। शाम द बगे अंजुमने सरकारे हुसैनी का मातमी जुलूस इमामबाड़ा से बरामद होकर विदुरकुटी रोड पहुंचा।
जहां सोगवारों ने सीना जख्मी और नोहा ख्वानी की। उसके बाद यह मातमी जुलूस नई बस्ती स्थित करबला पहुंचकर संपन्न हुआ। जुलूस में हसन जाफर, मोहम्मद अफरोज, तनवीर रजा, कमर अब्बास, मुजाहिद हसन, रईस हैदर, मोर्हरम अली, असफर मेहंदी, कायम मेहंदी आदि मौजूद रहे। मरसिया ख्वानी शबोउल हसन, अहमद रजा ने की। नोहा ख्वानी लख्ते हसन, कामरान, सलमान, फैसल, अली अब्बास ने इमाम हुसैन ककी शान में अपना कलाम पेश किया।