बिजनौर जिले में नौवीं मोहर्रम पर जोगीरम्पुरी, मेमन सादात, फजलपुर खास सहित कई शिया बहुल क्षेत्रों में मातमी आयोजन किए गए। सोगवारों ने करबला के शहीदों को नम आंखों से याद कर सीनाजनीं की। मातमी जुलूस भी बरामद किए गए।
जोगीरम्पुरी में हजरत इमाम हुसैन, उनके साथियों की शहादत और करबला की जंग मातमी मजलिसों में बयां होने से वातावरण गमगीन बना रहा। विद्वानों द्वारा करबला की जंग में हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत का जिक्र किया गया। उन्होंने कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने दीन और इस्लाम को बचाने के लिए बेशकीमती कुर्बानी दी।
मेमन सादात में इमाम हुसैन की फौज के बहादुर सिपाही हजरत अब्बास की याद में मातमी जुलूस बरामद किया गया। मो. बाकर सहित बड़ी संख्या में सोगवारों ने जुलूस में शिरकत की। उधर, फजलपुर खास में मोहर्रम की नौवीं तारीख को आयोजित मातमी मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना गुलाम सादिक ने कहा कि करबला के शहीदों की कुर्बानी को कयामत तक याद किया जाएगा। उन्होंनेे कहा कि हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों ने दीन और इस्लाम को बचाने के लिए अपनी कुर्बानी दी, लेकिन क्रूर बादशाह यजीद की पराधीनता स्वीकार नहीं की। वाकयाते करबला सुनकर लोग जार-जार रोए और सीनाजनीं की। नोहाख्वानी और मर्सियाख्वानी के बीच मातमी जुलूस बरामद किया गया। आबिद अंसारी, अबरार हुसैन, कासिम हुसैन, नजमुल, अनवार, इनामुद्दीन, शफी हैदर आदि मौजूद रहे। उधर, बिजनौर में भी नौवीं मोहर्रम का जुलूस मंगलवार को मोहल्ला काजीपाड़ा स्थित इमामबाड़ा से शुरू होकर नगर के मार्गों से होता हुए रात को इमाम बाड़ा पहुंचकर संपन्न हुआ। मंगलवार को ही अली अब्बास के आवास पर मजलिस का आयोजन किया गया।
मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना कमाल ताहिर ने कहा कि इमाम हुसैन की अजीम कुर्बानी किसी धर्म या जाति के लिए नहीं, बल्कि तमाम इंसानियत को जुल्म और दहशत से आजाद कराने के लिए थी। मजलिस के बाद सोगवारों ने सीनाजनीं करते हुए सदर बाजार, घंटाघर पर पहुंचकर सोगवारों ने जंजीरों से मातम किया। इस अवसर पर मुजाहिद हसन, मुस्तफा कमाल, अफरोज नकवी, मोहसिफ, तनवीर रजा और ताहिर हसन आदि मौजूद रहे।