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आखिर सात साल बाद परिजनों को मिल गई तमिलनाडु की सैल्वी, भाई से लिपटकर खूब रोई युवती

Thu, 18 Jul 2019 03:59 AM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर
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सात साल बाद परिजनों से मिली सैल्वी - फोटो : अमर उजाला
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तमिलनाडु से सात साल पहले लापता हुई युवती को जिला प्रशासन की मदद से उसके परिवार को सौंप दिया गया। युवती की काफी दिनों से दोदराजपुर के पालना घर में रखकर उपचार व काउंसलिंग की जा रही थी। भाई से मिलते ही युवती उससे लिपटकर रोने लगी। युवती को उसके भाई संग रवाना कर दिया गया है।

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दिसंबर 2017 में बिजनौर जनपद के नजीबाबाद में तहसील दिवस के दौरान एक समाजसेवी ने तत्कालीन डीएम अटल कुमार राय को ज्ञापन देकर बताया था कि गांव टांडा माईदास के पास एक युवती अर्द्धनग्न हालत में बदहवास घूम रही है। उसे किसी सुरक्षित ठिकाने पर रखने की गुहार लगाई गई थी। डीएम ने जिला प्रोबेशन अधिकारी संजय यादव को युवती को संरक्षण दिलाने के निर्देश दिए। जिला संरक्षण अधिकारी ने अपनी टीम के साथ युवती को संरक्षण में लेकर दोदराजपुर स्थित पालना गृह भिजवाया। वहां युवती कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं थी। युवती का वहां उपचार कराया गया, हालत में सुधार होने के कुछ दिन बाद उसकी काउंसलिंग की गई। लेकिन युवती तमिल में ही बात करती थी। उसकी बातें काउंसलिंग करने वाली महिलाओं की समझ में नहीं आती थीं।

वहीं हालत में कुछ और सुधार होने पर युवती ने कुछ कुछ शब्द अंग्रेजी के बोलने व समझने शुरू किए। उसने कुछ दिन पहले टीम को एक मोबाइल नंबर दिया। बाल कल्याण विभाग की टीम ने मोबाइल नंबर पर बात करके व वीडियो कॉल से युवती की बात कराई तो वह नंबर उसके घर का निकला।

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पता चला कि युवती तमिलनाडु के वेल्लूर की रहने वाली है। वह सात साल से गायब थी। उसका नाम सैल्वी बी है। उसका भाई जयप्रकाश बुधवार को उसे लेने आया। कलक्ट्रेट में सैल्वी बी ने अपने भाई को पहचान लिया और उसे देखकर रोने लगी। अधिकारियों की मौजूदगी में सैल्वी को उसके भाई को सौंप दिया गया। सैल्वी का भाई अपने साथ सैल्वी का आधार कार्ड, वोटर कार्ड, उसके पुराने फोटो भी लेकर आया था। डीएम ने सैल्वी बी को उसके परिजनों से मिलाने वाले जिला प्रोबेशन अधिकारी संजय यादव व उनकी टीम की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि टीम का यह कार्य मानवीय दृष्टिकोण से भी सराहनीय है।

इंग्लिश में नाम और नंबर लिखा
सैल्वी बी हिंदी का एक शब्द भी नहीं जानती थी। अंग्रेजी के कुछ शब्द उसे याद थे। उसने पालना घर में सबसे पहले टी कहकर चाय मांगी। इसके बाद वह कुछ कुछ अंग्रेजी के शब्द बोलती थी। कुछ दिन पहले उसने एक पेपर पर तमिल में कुछ लिखा व इंग्लिश में अपना नाम सैल्वी बी लिखा। तब टीम को उसका नाम पता चला। सैल्वी बी ने अपने घर का फोन नंबर भी लिखा। सैल्वी तमिलनाडु के एक स्कूल में अध्यापिका थी। बाद में उसने कुछ दिन एक प्राइवेट कंपनी में भी नौकरी भी की। उसने अपने छोटे भाई बहन के पालन में परिजनों की आर्थिक मदद भी की थी। उसके भाई जयप्रकाश ने बताया कि सैल्वी घर से लापता होने के कुछ दिन पहले डिप्रेशन का शिकार हो गई थी। डिप्रेशन के चलते ही वह घर से लापता हो गई। उसे हर जगह ढूंढा पर उसका कुछ पता नहीं चल सका। उन्होंने सैल्वी के मिलने की उम्मीद भी छोड़ दी थी।

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