पता चला कि युवती तमिलनाडु के वेल्लूर की रहने वाली है। वह सात साल से गायब थी। उसका नाम सैल्वी बी है। उसका भाई जयप्रकाश बुधवार को उसे लेने आया। कलक्ट्रेट में सैल्वी बी ने अपने भाई को पहचान लिया और उसे देखकर रोने लगी। अधिकारियों की मौजूदगी में सैल्वी को उसके भाई को सौंप दिया गया। सैल्वी का भाई अपने साथ सैल्वी का आधार कार्ड, वोटर कार्ड, उसके पुराने फोटो भी लेकर आया था। डीएम ने सैल्वी बी को उसके परिजनों से मिलाने वाले जिला प्रोबेशन अधिकारी संजय यादव व उनकी टीम की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि टीम का यह कार्य मानवीय दृष्टिकोण से भी सराहनीय है।
इंग्लिश में नाम और नंबर लिखा
सैल्वी बी हिंदी का एक शब्द भी नहीं जानती थी। अंग्रेजी के कुछ शब्द उसे याद थे। उसने पालना घर में सबसे पहले टी कहकर चाय मांगी। इसके बाद वह कुछ कुछ अंग्रेजी के शब्द बोलती थी। कुछ दिन पहले उसने एक पेपर पर तमिल में कुछ लिखा व इंग्लिश में अपना नाम सैल्वी बी लिखा। तब टीम को उसका नाम पता चला। सैल्वी बी ने अपने घर का फोन नंबर भी लिखा। सैल्वी तमिलनाडु के एक स्कूल में अध्यापिका थी। बाद में उसने कुछ दिन एक प्राइवेट कंपनी में भी नौकरी भी की। उसने अपने छोटे भाई बहन के पालन में परिजनों की आर्थिक मदद भी की थी। उसके भाई जयप्रकाश ने बताया कि सैल्वी घर से लापता होने के कुछ दिन पहले डिप्रेशन का शिकार हो गई थी। डिप्रेशन के चलते ही वह घर से लापता हो गई। उसे हर जगह ढूंढा पर उसका कुछ पता नहीं चल सका। उन्होंने सैल्वी के मिलने की उम्मीद भी छोड़ दी थी।
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