जिला अस्पताल में मरीजों के बारे में पूछताछ करते डीएम जगतराज त्रिपाठी।
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बिजनौर में डीएम ने अफसरों के साथ जिला अस्पताल का निरीक्षण किया। डीएम के अस्पताल पहुंचते ही स्टाफ में हड़कंप मच गया। डीएम को जिला अस्पताल में सात चिकित्सक और 15 कर्मचारी गैरहाजिर मिले।
डीएम ने गैरहाजिर मिले चिकित्सक व कर्मचारियों को एक दिन का वेतन काट दिया है। डीएम को महिला अस्पताल में स्थिति सुधारने के निर्देश दिए।
शुक्रवार को डीएम जगतराज त्रिपाठी और एडीएम एफआर सुरेंद्र राम ने सुबह साढ़े आठ बजे जिला अस्पताल का निरीक्षण किया। डीएम को जिला अस्पताल के निरीक्षण के दौरान दो चिकित्सक व एक कर्मचारी तथा महिला अस्पताल में पांच चिकित्सक व 14 कर्मचारी गैर हाजिर मिले। डीएम ने गैरहाजिर मिले चिकित्सक व कर्मचारियों का एक दिन का वेतन काट दिया है और जिला संयुक्त चिकित्सालय की उपस्थितिका रजिस्टर अपने साथ ले गए। उन्होंने बच्चा वार्ड के निरीक्षण के दौरान शौचालयों में गंदगी देख साफ सफाई के निर्देश दिए और आपरेशन के लिए बैठे मरीजों को नंबर जारी व आपरेशन के कपड़े देने का निर्देश दिया। इस दौरान उन्होंने इमरजेंसी, पैथोलॉजी लैब, ओपीडी, एक्सरे रूप आदि का भी निरीक्षण किया। महिला अस्पताल में उन्हें अधिकांश स्टाफ लापता मिला। जब वह कमरा नंबर चार पर पहुंचे तो वहां चिकित्सक न होने के कारण मरीजों की लंबी लाइन मिली। गांव गोपालपुर के तीमारदार ने डीएम को बताया कि अस्पताल के रैन बसेरे को एंबुलेंस के चालकों ने कब्जा रखा है और शौचालय में भी ताला लगा रखा है, इसके कारण तीमारदारों को रात जागकर गुजारनी पड़ती है। वार्ड में भर्ती यासमीन के पति मो. राशिद ने बताया कि जब से उनकी पत्नी को आपरेशन हुआ है तो कोई चिकित्सक नियमित चेकिंग के लिए नहीं आए, न ही कोई सुनवाई होती है। डीएम ने सीएमएस डा.आभा वर्मा को जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत जच्चा-बच्चा को मिलने वाले पेमेंट को डिलीवरी के तुरंत बाद देने के निर्देश दिए हैं। स्योहारा के भर्ती मरीजों ने शिकायत करते हुए कहा कि उनसे पट्टी करने के रुपये मांगे जाते हैं उनके द्वारा रुपये नहीं देने पर उनके साथ अभद्रता व्यवहार किया जाता है। डीएम ने कहा कि सभी लापरवाही से काम करने वाले के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।