संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। विशेष न्यायाधीश एससी एसटी एक्ट अवधेश कुमार ने ओम प्रकाश हत्याकांड में दोषी पाते हुए मोहित उर्फ मोनू को आजीवन कारावास और 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। दोष साबित नहीं होने पर मुर्गी फार्म के स्वामी नदीम को बरी कर दिया।
शासकीय अधिवक्ता शलभ शर्मा के अनुसार थाना मंडावली के ग्राम भागूवाला निवासी संजीव ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें कहा गया कि उसके पिता ओमप्रकाश और माता सरोज भागूूवाला के जंगल में नजीबाबाद निवासी नदीम अहमद के मुर्गी फार्म पर नौकरी करते थे। 26 सितंबर 2017 को उसका भाई अंकित सुबह नौ बजे माता और पिता का खाना लेकर मुर्गी फार्म पर गया, उस समय मुर्गी फार्म पर उसके पिता ओमप्रकाश और मां सरोज तथा पंद्रह दिन पूर्व नौकरी पर आया नौकर मोहित तथा फार्म स्वामी नदीम मौजूद थे।
खाना देकर वह लौट आया, उसके घर पर उसके ससुर आए थे, जोकि उसके माता पिता से मिलना चाहते थे। जब वह दस बजे उन्हें लेकर मुर्गी फार्म पर गया। तो वहां उसने देखा कि मुर्गी फार्म का मालिक नदीम मोहित से कह रहा है कि ओमप्रकाश फार्म की नौकरी छोड़कर नहीं जा रहा है, इसे खत्म कर दो। मोहित ने उसके पिता पर चाकू से वार करना शुरू कर दिया।
हमारे ललकारने पर मोहित और नदीम भाग गए। अधिक खून बह जाने की वजह से पिता ओमप्रकाश की मौके पर ही मौत हो गई। मौके के गवाहों ने अदालत ने अपने बयान में नदीम के घटना में शामिल होने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने दलित ओमप्रकाश की हत्या में मोहित को दोषी पाते हुए सजा सुनाई है।