बिना विशेषज्ञ चल रहे हॉस्पिटल को किया सील
बिजनौर। बिना विशेषज्ञ चिकित्सकों के ही मरीजों के ऑपरेशन करने और मरीजों को भर्ती करने के मामले में एक अस्पताल पर बड़ी कार्रवाई हुई है। एसडीएम सदर, डिप्टी सीएमओ और सीओ ने नजीबाबाद रोड स्थित जीवन हॉस्पिटल पर छापा मारा। टीम ने सर्जरी और चिकित्सकों का रिकॉर्ड न दिखाने, बिना लाइसेंस मेडिकल स्टोर चलाने, प्रतिबंधित दवाई मिलने समेत कई आरोप में हॉस्पिटल को सील कर दिया। अस्पताल के संचालक को भी हिरासत में लिया गया है।
प्रशासन को शहर में सेंट मेरी स्कूल के सामने जीवन हॉस्पिटल में विशेषज्ञ नहीं होने और मानक पूरे नहीं होने की शिकायत मिली थी। उच्चाधिकारियों ने निर्देश पर एसडीएम सदर मोहित कुमार ने बुधवार शाम हॉस्पिटल पर छापा मारा। इस दौरान डिप्टी सीएमओ डॉ. देवीदास, डीआई उमेश भारती को भी मौके पर बुलाया गया। एसडीएम ने बताया कि निरीक्षण में अस्पताल में बिना लाइसेंस मेडिकल स्टोर चलता मिला। स्टोर से कुछ प्रतिबंधित दवाइयां भी बरामद की गईं। अस्पताल में ऐसे मरीज भी मिले, जिनका ऑपरेशन हुआ था।
डिप्टी सीएमओ डॉ. देवीदास ने बताया कि पूछने पर अस्पताल स्टाफ ने सर्जरी करने वाले सर्जन का नाम उज्ज्वल पाल बताया। जबकि टीम ने उज्ज्वल पाल से बात की तो उन्होंने बताया कि वह आठ दिन से अस्पताल नहीं आए, उन्होंने ऑपरेशन नहीं किया है। टीम में डिप्टी सीएमओ डॉ. देवीदास, औषधि निरीक्षक उमेश भारती, सीओ अनिल कुमार आदि मौजूद रहे।
पांच महिलाओं को जिला महिला अस्पताल भेजा
अस्पताल में पांच महिलाएं भी मिलीं। जिनका एक से दो दिन के अंदर ऑपरेशन हुआ था। जिन महिलाओं का ऑपरेशन हुआ था, उनके इलाज के लिए टीम ने उन्हें जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया। ताकि उनका उपचार जारी रह सके।
बीयूएमएस चिकित्सक मिला, नहीं मिली कोई एनओसी
एसडीएम ने बताया कि अस्पताल में विशेषज्ञ की जगह केवल एक बीयूएमएस चिकित्सक मिला है। इसके अलावा फायर विभाग की एनओसी भी नहीं मिली। ईटीपी का सिर्फ प्रमाण पत्र मिला है, कोई प्लांट नहीं दिखाई दिया।
-------- कोट
मानकों पर अस्पताल खरा नहीं उतरा है। सर्जरी करने वाला कोई विशेषज्ञ नहीं मिला है, कई अन्य कमियां भी पाई गई हैं। जिसके बाद कार्रवाई करते हुए अस्पताल को सील किया गया है - डॉ. देवीदास, डिप्टी सीएमओ
------
मेडिकल स्टोर बिना लाइसेंस संचालित था। जिस पर कार्रवाई करते हुए करीब 60 हजार रुपये की दवाई बरामद की है। यह दवाई बिना लाइसेंस के नहीं बेची जा सकती है - उमेश भारती, औषधि निरीक्षक
------
जीवन हॉस्पिटल में कई कमियां मिली हैं। अस्पताल मानक पर खरा नहीं उतरा। जिसके बाद से अस्पताल पर कार्रवाई करते हुए सील किया गया है। अस्पताल संचालक को भी हिरासत में लिया गया है। मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी चल रही है - मोहित कुमार, एसडीएम सदर
बोर्ड पर विशेषज्ञों का दावा, एमबीबीएस कर रहे इलाज
- स्वास्थ्य विभाग सिर्फ रजिस्ट्रेशन के समय ही करता है अस्पताल की जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। जिले में तमाम ऐसे अस्पताल संचालित हैं। जिनमें दावा तो विशेषज्ञ होने का किया जा रहा है, लेकिन एमबीबीएस चिकित्सक ही गंभीर बीमारियों का इलाज कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग भी अस्पतालों की सिर्फ रजिस्ट्रेशन के समय ही जांच करता है। इसके बाद अस्पताल की ओर झांककर भी नहीं देखता।
मरीजों को लुभाने के लिए अस्पताल संचालक बोर्ड पर विशेषज्ञ होने का दावा करते हैं। अस्पतालों के फर्जी दावों के फंसकर मरीज अपना इलाज करा रहे हैं। अस्पतालों में विशेषज्ञ न होने से आए दिन मरीजों की हालत बिगड़ने की घटनाएं सामने आती हैं। इन अस्पतालों में मरीज के इलाज के लिए तीमारदारों से पैसा जमा करा लिया जाता है और हालत बिगड़ने पर मेरठ, दिल्ली रेफर कर देते हैं। बिजनौर में केवल एक ही न्यूरो सर्जन है। मगर कई अस्पतालों में न्यूरो सर्जन होने का दावा किया जा रहा है। शहर भर में कई अस्पतालों के होर्डिंग लगे हुए हैं। जिनमें न्यूरो सर्जन के नाम और समय लिखा हुआ है। इसके अलावा कई अन्य गंभीर बीमारियों के विशेषज्ञ होने के दावे खोखले हैं।
स्वास्थ्य विभाग इन बातों से इन्कार करता है। जब कार्रवाई ही नहीं होती है तो कैसे पता चले कि अस्पतालों में विशेषज्ञ है या नहीं। जब प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने शहर में जीवन हॉस्पिटल पर कार्रवाई की। जिसमें कोई विशेषज्ञ नहीं मिला, उनकी जगह एक बीयूएमएस चिकित्सक इलाज करता मिला। जिसके बाद अस्पताल को सील कर दिया गया।