किरतपुर। नए शैक्षिक सत्र में एनसीईआरटी की किताबें बाजार से गायब हैं। बहुत से निजी स्कूल छात्रों को निजी प्रकाशनों की किताबें खरीदने के लिए बाध्य कर रहे हैं। स्कूलों की इस मनमानी के चलते अभिभावकों की जेब पर कई गुना अधिक भार पड़ रहा है। बहुत से स्कूलों ने अपने परिसर में ही किताबों की दुकानें सजा रखी हैं।
एक अप्रैल से नया शैक्षिक सत्र शुरू हो गया है। हर साल की तरह इस वर्ष भी स्कूलों में एनसीईआरटी के कोर्स चलाने की अनिवार्यता है लेकिन स्कूल इन आदेशों को ठेंगा दिखा रहे हैं। सरकारी स्कूलों को छोड़ दें तो अधिकांश निजी स्कूल कोर्स में 50 से 90 फीसदी तक निजी प्रकाशनों की किताबें लगा रहे हैं। इन प्रकाशनों की पुस्तकें चुनिंदा दुकानों पर ही मिलती हैं। बच्चों के भविष्य के खातिर अभिभावक कर्ज लेकर भी महंगे कोर्स खरीद रहे हैं। नर्सरी और कक्षा एक का कोर्स भी तीन हजार से ज्यादा का मिल रहा है, जबकि एनसीईआरटी का कक्षा एक से तीन तक का कोर्स महज 65 से 80 रुपये में मिलता है। नगर में एक दो दुकानें ऐसी हैं जहां एनसीईआरटी की किताबें मिल रहीं हैं। एनसीईआरटी की किताबों की कमी है। पुस्तक विक्रेताओं के अनुसार एनसीईआरटी के कोर्स प्राइवेट कोर्सों के मुकाबले 10 से 20 गुना तक कम कीमत वाले हैं। कक्षा एक से तीसरी तक कोर्स 65 से 80 रुपये में मिलता है, जबकि कक्षा चार से 8वीं तक का कोर्स 300 रुपये तक मिलता है।
उधर, डीआईओएस जयकरण यादव का कहना है कि स्कूलों को एनसीईआरटी की किताबें लगाने के निर्देश दिए गए हैं। किताबों की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जा रही है। शिकायत मिलने पर निजी प्रकाशन का कोर्स लेने के लिए दबाव बनाने वालों स्कूलों पर कार्रवाई की जाएगी।