प्रबंध निदेशक को सजा का मामला
- परिजनों ने लगाया था विद्युत निगम पर लापरवाही का आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। जिस मामले में उपभोक्ता फोरम ने प्रबंध निदेशक, पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम, विक्टोरिया पार्क, मेरठ को तीन माह की सजा सुनाई है, वह 2016 में हुआ था। ट्यूबवेल चलाते समय करंट लगने से संजीव की मौत हो गई थी। इसमें परिजनों ने विद्युत निगम पर लापरवाही का आरोप लगाकर मुआवजा मांगा था। आयोग की पीठ ने प्रबंध निदेशक की गिरफ्तारी के लिए सजायाबी वारंट वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, मेरठ को संलग्न करते हुए प्रेषित करने का आदेश भी दिया है।
जिले के गांव तीबड़ी घेर निवासी सजीव कुमार 30 जून 2016 को अपने खेत पर ट्यूबवेल चलाने गया था। जहां उसे करंट लग गया था। दायर वाद में परिजनों ने कहा था कि क्षतिपूर्ति की मांग के बावजूद विद्युत निगम ने उनकी नहीं सुनी। इसके बाद 2018 में मृतक किसान की पत्नी श्रीमती कंचन देवी ने विद्युत निगम के अवर अभियंता, अधिशासी अभियंता, अधीक्षण अभियंता तथा प्रबंध निदेशक, पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम आदि को प्रतिपक्षी बनाते हुए परिवाद दायर कर दिया था।
21 सितंबर, 2022 को जिला उपभोक्ता आयोग की पीठ ने मृतक किसान की क्षतिपूर्ति के रूप में पांच लाख रुपये 9 प्रतिशत साधारण ब्याज सहित, 25 हजार मानसिक क्षतिपूर्ति और 7000 वाद-व्यय के रूप में निर्णय के 30 दिन के अंदर आयोग में जमा करने का आदेश दिया था। 30 दिन के पश्चात ब्याज की दर 11 प्रतिशत करने का आदेश दिया गया था। उपरोक्त राशि को मृतक किसान के विधिक-उत्तराधिकारियों में वितरित किया जाना था।
आरोप था कि विद्युत निगम ने आदेश को नहीं माना और किसान के परिजनों को इस धनराशि का भुगतान नहीं किया। निगम के पैरोकार द्वारा बार-बार भुगतान की प्रक्रिया लंबित कहकर न्यायालय से समय लेते रहे। इसके बाद कोर्ट ने तीन माह की सजा सुनाई।