बिजनौर में डीएम को नगर पालिका के निरीक्षण में तमाम खामियां मिलीं। सफाई निरीक्षक ये तक नहीं बता पाए कि शहर में कितनी गलियां हैं। सबसे हैरत की बात रही कि 26 लाख रुपये के निर्माण कार्य की फाइल में ईओ जेके आनंद के हस्ताक्षर के नीचे मुहर तक नहीं लगी थी। डीएम ने कहा कि लापरवाही की हद हो गई है। डीएम ने एक कार्य का छह महीने बाद भी भुगतान न होने पर लेखाकार सुभाषचंद्र शर्मा व लेखा लिपिक सईद का एक-एक महीने की तनख्वाह रोकने के निर्देश दिए। नगर पालिका द्वारा सप्लाई किए जा रहे पानी की जांच जल निगम से कराने को कहा।
डीएम वीके आनंद सबसे पहले नगर पालिका कार्यालय के सामने बने कैंपस में पहुंचे। डीएम ने शौचालय निर्माण में अनुदान के लिए आए 670 आवेदनों को कम बताया और इसके बारे में धर्मगुरुओं के माध्यम से जनता को जागरूक करने को कहा। सफाई निरीक्षक डीके अग्रवाल ने डीएम से बताया कि नागरिक कूड़ेदान नहीं रखने देते। डीएम ने कहा कि उन्हें समझाएं और गंदगी न फैलाने दें। उन्होंने 25 फरवरी को नगर में लेखपालों की टीम लगाकर सफाई व्यवस्था का निरीक्षण करने को कहा। निर्माण विभाग में चल रहे 103 कामों में काम शुरू होने से पहले किसी भी काम का पहले से फोटो न होने पर ईओ जेके आनंद व जेई उमेश बाबू को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने सभी निर्माण कार्यों के टेंडर कलक्ट्रेट में निकालने, इंटर लॉकिंग टाइल्स का पीडब्ल्यूडी लैब में परीक्षण कराने को कहा। निर्माण कार्यों की वारंटी छह महीने से बढ़ाकर एक साल करने को कहा। लेखा विभाग अब तक कंप्यूटराइज्ड न होने पर डीएम हैरान रह गए।
डीएम ने कहा पालिका को सुधारने के लिए अफसरों को कैंप करना होगा। उन्होंने कर्मचारियों को कार्य में सुधार करने के निर्देश दिए। उनके साथ एडीएम राममूर्ति मिश्रा व सभी तहसीलों के एसडीएम अौर पालिकाओं के ईओ भी मौजूद रहे।