राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन अभियान चलाकर महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ेगा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। ग्रामीण महिलाएं अब चूल्हा चौका करने के साथ घर बैठे मोटी कमाई करेंगी। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन अभियान चलाकर महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ेगा।
विकास भवन में मिशन के अधिकारियों एवं बैंक प्रबंधकों को इस संबंध में प्रशिक्षण दिया गया है। राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान हैदराबाद के जीबी मुयान एवं सुधांकर सतपथी प्रशिक्षक थे। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं को समूहों से जोड़ा जाएगा।
जिले के 11 ब्लाक में करीब डेढ़ लाख महिलाएं समूहों से जुड़ी है। राष्ट्रीय आजीविका मिशन ने जिले में वन ब्लाक वन प्रोडक्ट कार्यक्रम चला रखा है, जिसमें महिलाओं ने निजी व्यवसाय शुरू किए हैं। मिशन की बैंक सखी व जिला तथा ब्लाक प्रबंधको, बैंक प्रबंधको को समूहों को वित्तीय सुविधाएं देने के टिप्स दिए गए। वित्तीय वर्ष 2024-25 में उत्कृष्ट वित्तीय सेवा देने वाले 19 बैंक प्रबंधक को प्रशस्ति पत्र दिए गए।
समूहों के उत्पादों की बढ़ रही मांग
सीडीओ पूर्ण बोरा ने बताया कि समूह वन ब्लाक वन प्रोडक्ट के अंतर्गत विभिन्न उत्पाद तैयार कर रहे हैं। अफजलगढ़ ब्लाक के समूहों द्वारा तैयार किया जा रहे गुड़ व सरसों के तेल, हल्दौर ब्लाक के शहद, स्योहारा ब्लाक में समूह सिरका आदि की विदुर उत्पादों की गैर राज्यों चंडीगढ़, दिल्ली आदि में खूब मांग है। सेनेटरी पैड मेडिकल स्टोरों पर बिक रहे है। समूह उत्पादों की बिक्री से अच्छी कमाई कर रहे हैं। अधिक से अधिक ग्रामीण महिलाओं को समूहों से जोड़ा जा रहा है।
समूह की महिलाएं तैयार कर रहीं पोषाहार
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नजीबाबाद/जलालाबाद। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन का जलालाबाद क्षेत्र के मां अहिल्या प्रेरणा महिला माइक्रो एंटरप्राइजेज केंद्र नजीबाबाद और किरतपुर ब्लॉक की आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषाहार उपलब्ध कराने में पूरी तरह सक्षम हो चुका है। पहले पोषाहार बाहर से मंगाया जाता था, लेकिन अब करीब दो माह से टीएचआर (टेक होम राशन) केंद्र पर पोषाहार तैयार किया जा रहा है। एनआरएलएम के बीएमएम अनित कुमार ने बताया कि पोषाहार बौरेकी टीएचआर केंद्र पर समूह की महिलाएं तैयार करतीं हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों पर 3534 गर्भवती, 2784 धात्री महिलाएं, छह माह से तीन वर्ष आयु के 20584 बच्चे, तीन वर्ष से छह वर्ष आयु के 12752 बच्चे पंजीकृत हैं। इन सभी को टीएचआर केंद्र से प्रति माह पोषाहार उपलब्ध कराया जाता है।