बिजनौर में कलक्ट्रेट के बाहर सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों के वाहनों का चालन काटते एआरटीओ।
- फोटो : अमर उजाला
बिजनौर में हेलमेट न लगाने वाले और सीट बेल्ट का प्रयोग नहीं करने वाले 110 सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के चालान किए गए। साथ ही उन्हें भविष्य में यातायात नियमों का उल्लंघन नहीं करने की नसीहत दी गई। सभी से पुलिस ने मौके पर ही समन शुल्क वसूला।
जिला प्रशासन ने सोमवार से कलक्ट्रेट परिसर और उसके बाहर वाहन चेकिंग अभियान चलाया। सीडीओ इंद्रमणि त्रिपाठी, एसडीएम इंद्रजीत सिंह, एआरटीओ प्रवर्तन रमेश कुमार चौबे, सीओ सिटी गजेंद्र सिंह और टीएसआई सुरेंद्र कुमार सिंह ने संयुक्त रूप से कलक्ट्रेट के सामने वाहनों की चेकिंग की। वहां से गुजरने वाले कई सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के वाहनों के चालान किए गए। इस दौरान कई अधिकारी और कर्मचारी बिना हेलमेट लगाए हुए मिले तो वहीं कई ने चौपहिया वाहन में सीट बेल्ट का प्रयोग नहीं किया। एआरटीओ ने पुलिसकर्मियों के भी चालान किए। नगर पालिका और बीएसए ऑफिस पर भी अधिकारियों और कर्मचारियों के वाहनों को चेक किया गया। वहां भी कई कर्मचारी यातायात नियमों का उल्लंघन करते पाए गए। एआटीओ रमेश कुमार चौबे ने बताया कि 110 सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के वाहनों के चालान किए गए। एआरटीओ रमेश कुमार चौबे ने कहा कि यातायात नियमों का पालन करना सभी की जिम्मेदारी है।
जिला पूर्ति अधिकारी बिना सीट बेल्ट बांधे कार चलाते मिले
जिला पूर्ति अधिकारी मनीष कुमार सिंह सुबह करीब पौने दस बजे अपने ऑफिस के लिए जा रहे थे। चालक ने सीट बेल्ट नहीं लगा रखी थी। एआरटीओ ने उनकी गाड़ी का चालान किया। एआरटीओ रमेश कुमार चौबे ने अपने कार्यालय पर भी अभियान चलाया। इस दौरान वहां पर कई कर्मचारी बिना हेलमेट और सीट बेल्ट का प्रयोग करते पाए गए। वहां से भी 500 रुपये का समन शुल्क वसूला गया। उन्होंने कहा कि इस तरह के अभियान आगे भ्ाी चलाए जाएंगे।
एसीएमओ की गाड़ियों का भी हुआ चालान
सोमवार को सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को यातायात नियमों का पाठ पढ़ाने निकले एआरटीओ ने एसीएमओ रोहताश सिंह की गाड़ी का चालान किया। इसके अलावा जिला मलेरिया अधिकारी ब्रजभूषण की गाड़ी का भी चालान किया गया। एआरटीओ के मुताबिक दोनों एसीएमओ के वाहन चालकों ने सीट बेल्ट नहीं लगा रखी थी। एसडीएम इंद्रजीत सिंह के अनुसार अधिकारी व कर्मचारी जब यातायात नियमों का पालन करेंगे तो इसका संदेश पूरी जनता में जाएगा। प्रशासन राहगीरों की जान को सही सलामत रखने के लिए यातायात नियमों का पालन करने के लिए कहता है, लेकिन जनता को यह नियम बोझ लगते हैं।