- इतिहास के पन्नों में खो चुका है सहकारी संस्था के तौर पर चलने वाला कारखाना
- नजीबाबाद में खूजर के रस से बनाया जाता था गुड़, पड़ोसी राज्यों तक होती थी आपूर्ति
- ताड़ गुड़ के उद्योग की याद दिलाती है साल 1973 में बनी फिल्म सौदागर
फोटो समाचार
अचल चौधरी
बिजनौर। यूं तो जिले में तमाम सहकारी संस्थाएं अपना अस्तित्व खो चुकी हैं, लेकिन बिजनौर की पहचान रहा ताड़ गुड़ उद्योग भी रसातल में चला गया। नजीबाबाद में ताड़ गुड़ कारखाना का खंडहर इस बात को तस्दीक करने के लिए काफी है। जिन्हें देख ऐसा लगता है कि उन्हें ''''मंजूबी'''' का इंतजार है। दरअसल, फिल्म सौदागार में नायिका नूतन ने मंजूबी का एक बेहतरीन किरदार निभाया था, जो ताड़ गुड़ बनाने की अच्छी कारीगर थी।
1973 में एक फिल्म आई थी सौदागर। इस फिल्म में अभिनेता अमिताभ बच्चन ने मोती का किरदार निभाया। मोती गांव की विधवा महिला मंजूबी से शादी करता है। मंजूबी ताड़ के रस से गुड़ बनाने की बेहतरीन कारीगर थी, जिस गुड़ को मोती बाजार में बेचने में सफल हुए और व्यापार चल निकला। यह तो सौदागर फिल्म की कहानी थी, लेकिन इस फिल्म की तरह ताड़ गुड़ का व्यापार कभी नजीबाबाद मेें भी हुआ करता था।
शायद अब इस कारखाने को इंतजार है कि मंजूबी की तरह बेहतर गुड़ बनाने का कारीगर मिले और मोती की तरह मार्केटिंग हो तो ताड़ गुड़ उद्योग फिर से जिंदा हो सकता है। बता दें कि नजीबाबाद में कोटद्वार मार्ग पर ताड़ गुड़ कारखाने के खंडहर पड़े हुए हैं। अब आसपास के लोगों को भी मालूम नहीं कि यहां कौन सी फैक्टरी चला करती थी। पड़ताल में मालूम हुआ कि खादी ग्रामोद्योग के अधीन यह कारखाना सहकारी समिति संचालित करती थी। दशकों पहले खजूर का रस नहीं मिलने और तमाम कारणों की वजह से इस पर ताला लटक गया। बाद में कभी इसे फिर से संचालित करने के प्रयास नहीं हुए।
खजूर के पेड़ों से निकलता था नीरा
जिला ग्रामोद्याेग अधिकारी कुंवरसेन ने बताया कि नजीबाबाद में खूजर के रस से गुड़ बनाने का कारखाना था। यह कब बंद हुआ, उन्हें भी मालूम नहीं है। खजूर के पेड़ में चीरा लगाकर एक घड़ा बांध दिया जाता था। जिसमें खजूर के पेड़ का रस यानि नीरा भर जाता था। जिससे गुड़ बनाया जाता था। रेलवे लाइनों के किनारे भी खजूर के काफी पेड़ हुआ करते थे। नजीबाबाद में जिले का इकलौता कारखाना था। अब आसपास में कहीं भी ये कारखाने संचालित नहीं हैं।
कभी गांव गांव होते थे सैकड़ों खजूर के पेड़
आज बिजनौर में गन्ने के रस से गुड़ और चीनी बन रही है, लेकिन दशकों पहले यहां तमाम जगहाें पर खजूर के रस से गुड़ बनता था। खादी ग्रामोद्योग से जुड़े लोग बताते हैं कि पहले काफी गांव में खजूर के रस से गुड़ बनता था। उधर, इतिहास की किताबों में भी कहा जाता है कि बिजनौर में खजूर के काफी पेड़ हुआ करते थे। इन खजूर की टहनियों से हाथ से हवा करने वाला पंखा खूब बनता था।
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नजीबाबाद में खजूर के रस से गुड़ बनाने का कारखाना था, जिसे सहकारी समिति संचालित करती थी। यह कब बंद हुआ यह तो जानकारी नहीं है। हालांकि पहले रेलवे लाइनों के किनारे भी खजूर के काफी पेड़ हुआ करते थे, जिनसे नीरा निकालकर गुड़ बनता था। ऐसा ही एक कारखाना मुरादाबाद में भी था - कुंवरसेन, जिला ग्रामोद्योग अधिकारी