फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bijnor News: तापमान में उतार-चढ़ाव से खरीफ फसलों पर मंडरा बीमारी का खतरा

विज्ञापन
विज्ञापन
बिजनौर। वर्तमान में तापमान में उतार-चढ़ाव से मनुष्य ही फसलों पर बीमारी का खतरा मंडरा रहा है। गन्ने में शीर्ष भेदक कीट (टाॅप बोरर) एवं पोका बोइंग का प्रकोप दिखाई दे रहा है। ये बीमारी लगने पर गन्ने के शीर्ष वाली पत्ती पर समान दिशा में छेद दिखाई देते हैं। उधर धान की फसल में खैरा रोग, दीमक एवं जड़ की सूडी बीमारी का खतरा बना हुआ है। कृषि रक्षा विभाग ने फसलों को बीमार से बचाव को जानकारी दी है।
विज्ञापन


- ऐसे करें बचाव
जिला कृषि रक्षा अधिकारी मनोज रावत ने बताया कि धान में दीमक एवं जड़ की सूडी की बीमारी दिखाई दें, तो किसान क्लोरपायरीफाॅस 20 प्रतिशत ईसी 2.50 लीटर मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से सिंचाई के पानी के साथ प्रयोग करें।
खैरा रोग के लिए 5 किग्रा जिंक सल्फेट 21 प्रतिशत को 20 से 25 किग्रा यूरिया में मिलाकर बिखेर दें। अथवा 2.50 किग्रा बुझे हुए चुने को प्रति हेक्टेयर की दर 1000 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए।
विज्ञापन

- गन्ने की फसल के लिए
जिला कृषि रक्षा अधिकारी मनोज रावत ने बताया कि इस समय गन्ने में पोका बोइंग का क्लोरोटिक चरण दिखाई दे रहा हैं। इसमें पौधों की शीर्ष वाली पत्ती के आधार पर पीला रंग आ जाता है और पत्ती लिपट कर निकलती है। इसकी रोकथाम के लिए कार्बेण्डाजिम 12 प्रतिशत प्लस मैन्कोजेब 63 प्रतिशत डब्ल्यूपी की 400 से 500 ग्राम मात्रा का प्रति एकड़ की दर से स्प्रे करें।
शीर्ष भेदक कीट की रोकथाम के लिए कार्बोसल्फान 25 प्रतिशत ईसी की 400 से 500 एमएल मात्रा का 200 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ की दर से स्प्रे करें या फिप्रोनिल 5 प्रतिशत एससी की 600 से 800 एमएल मात्रा का 200 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ की दर से स्प्रे करें।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें