बिजनौर, कालागढ़। कालागढ़ में गिद्धों की लंबे समय के बाद वापसी से वन विभाग में उत्साह है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अब उनके यहां काॅलोनियों में गिद्धों से आबाद होने की आशा प्रबल हो गई। गिद्धों का एक बड़ा झुंड दिखाई देने से वन विभाग, वन्यजीव प्रेमी गदगद हैं।
कार्बेट टाइगर रिजर्व की कालागढ़ रेंज में वन एवं वन्यजीवों के अलावा पक्षियों का एक बड़ा संसार मौजूद है। यहां लगभग विलुप्त हो चुके पक्षी भी कई बार नजर आ जाते हैं। कालागढ़ में सूखास्रोत गिद्ध का एक समृद्ध प्राकृतावास रहा है। 90 के दशक के दौरान यहां से गिद्ध गायब हो गए थे। जबकि कालागढ़ में इंटर कॉलेज, प्राथमिक पाठशाला, नई काॅलोनी में उत्तरी क्षेत्र के वनों में बड़ी संख्या में गिद्ध रहा करते थे। यहां मृत पशुओं को गिद्ध कुछ ही समय में समाप्त कर देते थे।
इंटर कॉलेज के निकट सूखास्रोत में बाघ का विचरण होता रहता है। किसी जीव के अवशेषों को देखते हुए ये गिद्ध यहां पहुंच गए। वनकर्मी सुनील कुमार व हरीश चंद्र सुंदरियाल मौके पर पहुंचे। साथ ही राहगीरों ने भी उनका वीडियो बनाया। संजय कुमार, राकेश कुमार, सुरेश सिंह आदि का कहना है कि लगभग 30-35 वर्ष के बाद यहां इतनी अधिक संख्या में गिद्ध दिखाई दिए हैं।
वन्यजीव प्रेमियों नवाब साद बिन आसिफ, अरण्य संस्था के सचिव व सेवानिवृत्त डीएफओ नरेंद्र सिंह का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण के लिए गिद्ध आवश्यक हैं। इनका कालागढ़ में दिखाई देना क्षेत्र के पर्यावरण को शुद्धता प्रदान करने के लिए अच्छा संकेत है। (संवाद)
- अनेक दवाओं पर प्रतिबंध, संरक्षण का सार्थक परिणाम
कार्बेट टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक दिगान्थ नायक का कहना है कि मृत पशुओं के शवों पर छिड़कने वाली व खेतों में डाली जाने वाली अनेक घातक दवाइयों पर पक्षियों को लुप्त होने से बचाने के लिए लगाए प्रतिबंध व कार्बेट में संरक्षण का परिणाम सार्थक है। यहां का पर्यावरण स्वच्छ है। आशा है कि यहां गिद्ध अपनी काॅलोनियां फिर से आबाद कर सकेंगे।