नदी के उफान के चलते ग्रामीण अपने घरों में कैद होकर रह जाते हैं। गांव पीतमगढ़ के दोनों ओर के रास्ते रिजर्व फॉरेस्ट में होने के कारण आज तक विकास नहीं हो सका। नदी पार करने के लिए कठियारी नदी पर न तो रपटा है और न ही पुल का निर्माण कराया गया। पीतमगढ़ में पहुंचने के लिए अन्य कोई रास्ता नहीं है।
किसान का फंस गया था ट्रैक्टर, मुश्किल से बची जान
दो दिन पूर्व गांव पीतमगढ़ के किसान बुध सिंह का ट्रैक्टर कठियारी नदी के उफान में फंस गया था। नदी का जलस्तर बढ़ता देखकर ट्रैक्टर पर बैठे अन्य किसानों ने भागकर अपनी जान बचाई। जलस्तर कम होने के बाद अन्य ट्रैक्टर की मदद से फंसे हुए ट्रैक्टर को नदी से बाहर निकाला गया था।
पीतमगढ़ के लोग प्रतिवर्ष ह्यूम पाइप डालकर आवाजाही के लिए कच्चा रास्ता बनाते हैं, लेकिन बरसात में नदी के तेज बहाव में रास्ता बह जाता है। साल दर साल यही सिलसिला चला आ रहा है। ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन से नदी पर पुल बनाने की मांग की, लेकिन ग्रामीणों को सिर्फ आश्वासन मिला।