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बाढ़ के जख्मों पर जनप्रतिनिधि नहीं लगा पाए मरहम

Sat, 07 Jan 2017 12:27 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
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बिजनौर के ग्राम ब्रह्मपुरी में बाढ़ के बाद घरों में भरा पानी (फाइल फोटो)। - फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर में आजादी के 70 साल बाद भी बिजनौर विधानसभा के लोगों को बाढ़ की समस्या से निजात नहीं मिल पाई है। ग्रामीणों अंचलों के लोगों को आज भी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं। बिजली की आंख मिचौली का खेल इस विधानसभा क्षेत्र में चलता रहता है। विधायक व सांसद चुनाव के दौरान वादे तो करते हैं, पर ये वादे पूरी तरह परवान नहीं चढ़ पाए। उपचुनाव में जीती सपा विधायक रुचिवीरा ने विकास कराने का बीड़ा उठाया है।
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चुनाव आने पर नेता वादे तो खूब करते हैं, पर चुनाव जीतने के बाद ये वादे पूरे नहीं किए जाते हैं। विकास कराने की खूब बातें होती हैं। क्षेत्र के लोग अपनी समस्याओं के निपटारे के लिए सभी दलों पर भरोसा करते आए हैं, पर जनप्रतिनिधि उनकी समस्याओं के प्रति सजग नहीं दिखाई देते। 
विधानसभा चुनाव का बिगुल बजने के बाद नेताओं ने स्थानीय मुद्दों को चुनाव में हथियार बनाने का ताना बाना बुनना शुरू कर दिया है। जातिगत आधार पर भी यह वोटरों को रिझाने की जुगत में लगे हैं। बिजनौर विधानसभा क्षेत्र महाभारत सर्किट से जुड़ी है। इस विधानसभा में आने वाले गंजदारानगर में गंगा के तट पर महात्मा विदुर की कुटी है। इस कुटी पर ही भगवान कृष्ण ने दुर्योधन के 56 भोगों को त्यागकर विदुरकुटी में आकर बथुए का साग खाया था। महर्षि कण्व का आश्रम भी इस क्षेत्र में रावली के पास है। यहां पर राजा भरत के पिता राजा दुष्यंत और शकुंतला का मिलन हुआ था।      
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राजा भरत ने बिजनौर की धरती पर ही जन्म लिया था और उनके नाम पर देश का नाम भारत पड़ा।  सियासी दलों के नेता चुनाव में नए समीकरण में रंग भरने के साथ चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी में जुटे हैं। बिजनौर विधानसभा क्षेत्र भाजपा का गढ़ रहा है। 1991 व 1993 में भाजपा से महेंद्रपाल सिंह विधायक बने। 1996 में इस सीट पर बसपा ने कब्जा कर लिया। बसपा के राजा गजंफर अली विधायक बने। 2002 में इस सीट पर हिंदुत्व के फार्मूले पर फिर से भाजपा ने कब्जा कर लिया। पहली बार चुनाव लड़ रहे भारतेंद्र सिंह विधायक बने। 2007 में दलित मुस्लिम गठजोड़ से बसपा प्रत्याशी शाहनवाज राना ने इस सीट पर कब्जा कर लिया, पर 2012 के चुनाव में फिर से भारतेंद्र सिंह अपने पुराने फार्मूले से फिर    से इस सीट पर काबिज हो गए। 2014 में उपचुनाव में पहली    बार सपा ने सीट कब्जा ली। सपा की रुचि वीरा यहां से विधायक बन गईं। अब इस चुनाव पर सभी की नजर लगी है आैर उम्मीदें टिकी हैं।

बिजनौर विधानसभा के खादर क्षेत्र में हर साल बाढ़ किसानों की फसलों के लिए काल बनकर आती है। खादर क्षेत्र में रहने वाले लोगों को अपने घरों को छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ता है। आलम यह रहता है कि फसलें तो चौपट हो ही जाती हैं, उनके घरों में भी पानी भर जाता है। चुनाव में गंगा किनारे तटबंध बनाने के हर चुनाव में नेता वादे करके जाते हैं, पर चुनाव के बाद कोई तटबंध नहीं बनवाता। 
इसके अलावा भी तमाम समस्याएं लोगों को रुलाती रहती हैं। बिजली की आंख मिचौली से भी जनता बेहाल रहती है। जिला मुख्यालय को भले ही ठीक ठाक बिजली मिल जाती है पर नगर पंचायत कस्बा झालू, मंडावर व देहात क्षेत्र के लोग बिजली के लिए तरसते रहते हैं। 
लंबे समय से बिजनौर से मुंबई के लिए ट्रेन चलाने की मांग होती आ रही है। चुनाव के दौरान प्रत्याशी ट्रेन चलवाने का वादा करते हैं, लेकिन   
बाद में भूल जाते हैं।
महाभारत काल की महात्मा विदुरकुटी का विकास कराने के लिए जनप्रतिनिधि चुनाव के दौरान वादे तो करते आए हैं, लेकिन विदुरकुटी का विकास नहीं हो पाया। भाजपा सांसद भारतेंद्र सिंह ने चाहे लोकसभा का चुनाव लड़ा हो या विधानसभा का, उनके सामने भी यह मुद्दा आता रहा है। विधानसभा के उपचुनाव में विधायक रुचिवीरा के सामने भी विदुरकुटी के विकास का मुद्दा उठा था। इससे पहले भी यह मुद्दा जनप्रतिनिधियों के सामने उठता आया है।
शहर के एकमात्र पार्क इंदिरा पार्क के जीर्णोद्धार का मामला शहर के लोग जनप्रतिनिधियों के सामने उठाते आए हैं, पर जनप्रतिनिधियों ने कभी भी इंदिरा पार्क को संवारने के लिए कुछ नहीं किया। जनप्रतिनिधियों ने लोगों से इंदिरा पार्क के विकास का वादा करते रहे, पर कभी भी कोई काम नहीं कराया। पार्क के लिए अपनी निधि से किसी विधायक व सांसद ने कोई पैसा भी नहीं दिया।
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