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करबला के शहीदों को याद कर रोए जायरीन

Sat, 20 May 2017 02:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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दरगाह पर जुमे के नमाजियों को खिताब करते कुर्रतुल एन मुज्तबा। - फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर के नजीबाबाद में जोगीरम्पुरी दरगाह परिसर में मातमी मजलिसों और जुलूस से माहौल गमगीन है। हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत और उन पर हुए जुल्म की दास्तां सुनकर जायरीन जार-जार रोने और सीनाजनी के लिए मजबूर हैं।
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दरगाह परिसर में बड़ी संख्या में जायरीनों ने जुमे की नमाज अदा कर दुनिया में अम्नोअमान की दुआ की।नजफे हिंद जोगीरम्पुरी दरगाह परिसर में अलम जुलूस, नोहा और मरसियाख्वानी के साथ शम्सुल हसन हॉल से मौला ए कायनात के जिक्र के साथ गमगीन माहौल में जायरीन दरगाह परिसर की जियारत कर मन्नतें मांगने में मशगूल हैं।

शुक्रवार को नौगांवा से आए मौलाना कुर्तुल एन मुज्तबा ने दरगाह परिसर स्थित मस्जिद में हजारों जायरीनों को जुमे की नमाज पढ़ाई। नमाजियों से खिताब में मौलाना ने कहा कि नमाज ए जुमा अल्लाह और रसूल की अजीम कांफ्रेंस के रूप में करार दी गई है।
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हर हफ्ते अल्लाहताला ने हमें एक साथ बैठकर दीन के जिक्र के साथ अपने मसाइल के बारे में सोचने का मौका दिया है। उन्होंने बुराइयों से दूर रहने, अखलाक और अदब को जिंदगी में उतारने तथा औरतों को पर्दे का एहतराम करने की सलाह दी।

उधर, शम्सुल हसन हॉल से नसीमुल बाकरी के संचालन में शुक्रवार को दिनभर मातमी मजलिसें मुनक्किद की गईं।

मजलिस को खिताब करते हुए बनारस से आए जोगीरम्पुरी दरगाह पर जुमे के नमाजियों को खिताब करते कुर्रतुल एन मुज्तबा।मौलाना एजाज हसनैन, मौलाना फसीह हैदर, मौलाना शिकोह हैदर, मौलाना कुर्रतुल एन मुज्तबा ने कहा कि करबला की जंग हक और बातिल की जंग थी।
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इल्म के सहारे ही हजरत इमाम हुसैन उनके 72 साथियों ने क्रूर बादशाह यजीद की फौज को घुटने टेकने के लिए मजबूर कर दिया।
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