बिजनौर में मोहर्रम की दसवीं तारीख को सोगवारों ने जंजीरों, छुरियों से मातम कर जुलूस निकाला और इमाम हुसैन की शहादत को याद किया। इमाम हुसैन के पैगाम को दुनिया में फैलाने की बात कही गई। नई बस्ती स्थित करबला में जाकर ताजिए दफनाए गए। इस्लाम को आतंकवाद का विरोधी बताया गया।
मोहल्ला बुखारा स्थित इमामबाड़ा में आयोजित मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना कमाल ताहिर ने कहा कि इमाम हुसैन की कुर्बानी ने इंसान को आजादी ए फिक्र और जिंदगी जीने का सलीका अता किया। यजीद ने मुसलमानों का खलीफा बनने के बाद इस्लाम की शिक्षाओं को ही बदल दिया। उसने हरामे मोहम्मदी को हलाल और हलाले मोहम्मदी को हराम कर दिया था। नवासाए रसूल इमाम हुसैन ने यजीद के खिलाफ आवाज बुलंद की। करबला की जंग इसी का परिणाम थी। यजीद ने इमाम हुसैन पर जुल्मों सितम की इंतहा कर दी।
मजलिस के बाद शबीहे जुल जनाह बरामद किया गया। इसके बाद अंजुमने सरकारी हुसैनी का जुलूस इमामबाड़ा से बरामद होकर विदुरकुटी रोड पहुंचा। वहां सोगवारों ने जंजीरों से मातम किया। इसके बाद जुलूसे अलम मुजाहिद हसन, रूहुल हसनैन, मोहसिफ हसन, तनवीर रजा, अफरोज नकवी, अली जावेद, रईस हैदर के नेतृत्व में नई बस्ती पहुंचा और वहां ताजिए दफन किए गए। नश्तर जयपुरी, लख्ते हसन, चिराग बिजनौरी ने इमाम हुसैन की शान में कलाम पेश किया। मरसिया ख्वानी मंजर हसन व शबीउल हसन, नोहा ख्वानी कामरान, सलमान, साजिद, जाफर अब्बास, परवेज व महशर ने की। मजलिस का संचालन ताहिर हसन ने किया।
गजरौलाशिव। गांव जंदरपुर में मौलाना नकी हैदर ने मजलिस को खिताब किया। इसके बाद जुलूस निकाला गया और सोगवारों ने मातम किया। करबला में ताजिए दफन किए गए। अली सज्जाद, हुसैन अहमद, हुसैन अब्बास, शान हैदर, मुनिया आदि मौजूद रहे।
कोतवाली देहात। क्षेत्र के कई गांवों में मोहर्रम का मातमी जुलूस निकाला गया। मजलिस को मौलाना हामिद हुसैन ने खिताब किया। मोहर्रम का मातमी जुलूस अपराह्न तीन बजे मोहल्ला सादात स्थित इमाम बारगाह से शुरू हुआ।
नहटौर मार्ग वाले मुख्य तिराहे पर मौलाना हामिद हुसैन, शौजफ, सययद नौनिहाल मेहंदी, आजम जैदी आदि ने नोहाख्वानी पढ़ी। सोगवारों ने जंजीरों, छुरियों से सीनाजनी करते हुए मातम किया। मौलाना हामिद हुसैन ने कहा कि इमाम हुसैन ने 1400 वर्ष पूर्व कह दिया था कि मेरे नाना के इस्लाम में आतंकवाद के लिए कोई जगह नहीं है। जुलूस में सैय्यद इफ्तेखार जैदी, मोहम्मद हैदर, सैय्यद फिरोज हैदर जैदी, शाने मेंहदी, सना हैदर जैदी, असलम जैदी, रजा हैदर जैदी, समर आदि मौजूद रहे। गांव बेगमपुर शादी उर्फ रामपुर, बरूकी, करौंदा पच्दू, पित्तनहेड़ी जिया, शादीपुर आदि गाव मे भी मोहर्रम का जुलूस निकाला गया।
हल्दौर। गांव छजुपुरा सादात में मोहर्रम का जुलूस निकाला गया। मौलाना नदीम अब्बास, मौलाना अहमद रजा ने मजलिस को खिताब किया। हैदर, मौलाना अहमद, सरताज, काशिफ, मंजर, आशु, हैदर अब्बास आदि ने जंजीरों और छुरियों से मातम किया। सोज ख्वानी मजाहिर हुसैन, मोहम्मद रजा, नायब, मोहम्मद अब्बास, पेश ख्वानी शमीम जैदी, रईस जैदी, नोहा ख्वानी फिरोज, हाशिम, सादिक, सालिम ने की। करबला में पहुंचकर ताजिए दफन किए गए।
चांदपुर। मोहल्ला महल सादात में मरहूम ततहीर अब्बास के खिलाब किया। अंजुमने यादगारे हुसैनी ने ताजिया, जरी व अलम का जुलूस बरामद किया। जुलूस शाहिद हुसैन की इमाम बारगाह में पहुंचा। जहां सोगवारों ने आग व जंजीर का मातम किया। मर्सिया ख्वानी बदरूल हसन, मसूद जौन, यासर आदि ने की। नौवा ख्वानी नदीम, परवेज, यूशा, रजा, हसन, फरहान, मोहम्मद अब्बास आदि ने की। आग व जंजीर का मातम साजिद हुसैन, माहिर, माजिद, अर्शी, कामिल आदि ने किया। जुलूस में मौलाना आसिफ द्वारा एक तकरीर महल के फाटक के बाहर की गई। संचालन शाहिद हुसैन, अली रजा, शाने रजा, रजा अस्करी, रईस हैदर, यासर अब्बास जैदी आदि ने किया।