जोगीरम्पुरी दरगाह पर दुआ करती महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला
बिजनौर के नजीबाबाद में दरगाह का शमशुल हसन हाल दीन-ए-इस्लाम और वाकयाते करबला के जिक्र से दिनभर गूंजता रहा। अंजुमनों ने मातमी जुलूस बरामद किए। उधर मौला अली की बारगाह में मन्नतें मांगने और करबला के शहीदों को याद करने के लिए सोगवार उमड़े रहे।
नजफ-ए-हिंद जोगीरम्पुरी दरगाह की सालाना मजलिसों के दूसरे दिन या अली मौला अली, मुश्किल कुशा मौला अली की सदाओ से हॉल गूंजता रहा। मजलिस को खिताब करते हुए बनारस से आए मौलाना एजाज हुसैन गदीरी ने कहा कि इस्लाम दीन-ए-अमन है। इस्लाम ने हमेशा सलामती का पैगाम दिया है।
मदीने से लेकर करबला तक नजर डाली जाए तो इंसानियत, बराबरी और दीन के लिए कुर्बानी का जज्बा मिलता है। उन्होंने कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने अपने नाना के दीन को बचाने के लिए अपनी और अपने साथियों की कुर्बानी दी। नजीर बाकरी के संचालन में शुक्रवार को दिनभर चली मातमी मजलिसों में वाकयाते करबला का जिक्र आते ही सोगवार नम आंखों से सीना जनी को मजबूर हुए।
मातमी मजलिसों को कुर्रतुल एन मुज्तबा, मौलाना नईम अब्बास, डॉ.अब्बास अली नकवी, मौलाना वजीर अब्बास, मौलाना कौसर मुज्तबा, मौलाना शबाब हसन सिरसवी, मौलाना असद यावर मुजफ्फरपुरी सहित अनेक उलेमा ने खिताब किया। नौगांवा सादात से आए मौलाना कुर्रतुल एन मुज्तबा ने हजारों जायरीनों को जुमे की नमाज अदा कराई।