बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में थोड़े से प्रयास से अतिरिक्त जल भराव से मुक्ति पाई जा सकती है। इस पानी को बोरिंग के जरिए भूगर्भ में डाला जा सकता है। इससे फसल को ज्यादा पानी से तो मुक्ति मिल ही जाएगी, भूगर्भ जल रिचार्ज भी जल्दी से होगा। हरियाणा राज्य के किसान इस विधि को अपना चुके है। इसे यूपी में भी लागू किया जाएं तो बेहतर नतीजे सामने आएंगे।
पहाड़ों पर बरसने वाला पानी अनेक नदियों के जरिए मैदान में कहर बरपाता है। जिले में भी मंडावर, जलीलपुुर, नगीना, चांदपुर आदि के खेती के काफी हिस्से में गंगा, खो, मालन आदि का पानी भर जाता है। अधिक समय तक खेतों में पानी भरने से खेत में खड़ी फसल बर्बाद हो जाती है। साथ ही लंबे समय तक खेत में पानी भरा रहने से किसान खेत में कोई दूसरी फसल भी बो नहीं पाता है।
ऐसे खेत में भरा रहने वाला पानी भी काफी दिनों बाद खेत सोखता है। काफी जल भाप बनकर उड़ भी जाता है। यानि किसान को खेती और प्रकृति को पानी की बर्बादी का नुकसान उठाना पड़ता है। मगर, जरा से प्रयास से इन दोनों बर्बादी को रोका जा सकता है। जमीन में बोरिंग करके इस पानी को जरूरत के हिसाब से पानी में डाला जा सकता है।
फसल से अतिरिक्त पानी से मुक्ति मिल सकती है। हरियाणा में भूगर्भ जल रिचार्ज करने के लिए किसान बोरिंग का सहारा ले रहे हैं। इसके अलावा जिन क्षेत्रों में बाढ़ का असर रहता है वहां भी किसान बोरिंग का इस्तेमाल पानी को जमीन में डालने में कर रहे हैं। प्रशासन व ग्राम प्रधान इस ओर ध्यान दें तो इससे जिले में हजारों हेक्टेअर जमीन में फसल को बचाया जा सकता है।
ऐसे होगा काम
जंगल के बड़े रकबे में खेत से बाहर की ओर जगह जगह पर बोरिंग किए जा सकते हैं। इन बोरिंग का पानी जमीन से जरूरत के हिसाब से ऊंचा किया जा सकता है। बोरिंग के चारों ओर दो मीटर की परिधि का गड्ढा खोदा जाता है। गड्ढे की गहराई एक मीटर होगी। जैसे ही खेत में बाढ़ का पानी आएगा वह पाइप के जरिए जमीन में जाने लगेगा। पाइप पर जाली लगाकर कूड़े आदि को जमीन में जाने से रोका जा सकता है।
खुद जमीन में जाएगा पानी
खेत से पानी पंपिंग सेट से निकाला जाता है, लेकिन बोरिंग के जरिए पानी को बिना पंपिंग सेट के जमीन में भेजा जा सकता है। पंपिंग सेट से एक बीघे का खेत अगर एक घंटे में भरता है तो उतना पानी वापस जाने में अधिकतम डेढ़ से दो घंटे का समय लगेगा।
बोरिंग से बाढ़ के पानी से रिचार्ज होगा भूगर्भ जल
वर्धमान कॉलेज के भूगोल विभाग के अध्यक्ष डा. एकेएस राणा के अनुसार बोरिंग से पानी को बहुत तेजी से भूगर्भ में भेजा जा सकता है। यह बाढ़ के प्रभाव को कम करने व भूगर्भ जलस्तर को रिचार्ज करने का सबसे कारगर तरीका है। इस पर जिले में काम होना चाहिए।
प्रधान करेंगे सहयोग
अखिल भारतीय ग्राम प्रधान संगठन जिलाध्यक्ष मुकेश दहिया के अनुसार ग्राम प्रधान जल संरक्षण अभियान में पूरा सहयोग कर रहे हैं। बोरिंग से भूगर्भ में बाढ़ का पानी डालने के बारे में अधिकारियों व बाकी प्रधानों से बात की जाएगी।
बोरिंग से पानी जमीन में डालना एक तकनीकी प्रक्रिया है। इसका जिले में परीक्षण कराया जाएगा। परीक्षण में देखा जाएगा कि कितना पानी कितने समय में जमीन में जा रहा है। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। - प्रवीण मिश्र, सीडीओ।