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कार्तिक पूर्णिमा पर बन रहा है दुर्लभ पदमक योग

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कार्तिक पूर्णिमा पर बन रहा है दुर्लभ पदमक योग
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बिजनौर। धार्मिक संस्थान विष्णुलोक के ज्योतिषविद पंडित ललित शर्मा ने बताया कि इस बार कार्तिक पूर्णिमा पर दुर्लभ व शुभ पदमक योग बन रहा है। कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान करने का शुभ मुहूर्त 19 नवंबर को ब्रह्म मुहूर्त से दोपहर दो बजकर 29 मिनट तक है। बताया कि अगर श्रद्धालु किसी पवित्र नदी या घाट पर स्नान नहीं कर सकते हैं तो घर में ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं।
पंडित ललित शर्मा ने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा पर महादेव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का संहार किया था। इसलिए इसे त्रिपुरी पूर्णिमा भी कहते हैं। त्रिपुरासुर का संहार होने पर देवताओं ने दीये जलाए थे, इसलिए कार्तिक पूर्णिमा को देव दीपावली भी कहते हैं। इस दिन गंगा स्नान, दीपदान, हवन, यज्ञ आदि का विशेष महत्व होता है। पवित्र नदी के किनारे दीपदान करना चाहिए। इस दिन कृतिका पर चंद्रमा और विशाखा पर सूर्य हो तो पदमक योग बनता है जो पुष्कर में भी दुर्लभ है।
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इस बार कार्तिक पूर्णिमा पर पदमक योग बन रहा है। इस योग में गंगा में स्नान व दीपदान करने पर तीर्थराज पुष्कर में स्नान करने के समान पुण्य फल प्राप्त होता है और वर्ष भर जाने अनजाने किए जाने वाले पापों से मुक्ति मिलती है। कहा कि अगर दीपदान करने के लिए नदी किनारे नहीं जा सकते हैं तो देवस्थान पर जाकर दीपदान करना चाहिए। घी के पांच दीये अवश्य जलाने चाहिए। सिख समुदाय में कार्तिक पूर्णिमा को प्रकाशोत्सव के रूप में मनाया जाता है, क्योंकि इस दिन सिख समुदाय के संस्थापक गुरु गुुुरुनानकदेव जी का जन्म हुआ था।
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