वसूली पर रार, ग्राम प्रधान संघ और पंचायत सचिवों में तकरार
बिजनौर। ग्राम प्रधान संघ ने पंचायत सचिवों पर पैसे वसूलने के आरोप लगाए। प्रधानों को अपमानित करने, विकास कार्यों के क्रियान्वयन में दिलचस्पी नहीं लेने के आरोप जड़े। प्रधानों का आरोप है कि प्रशासक कार्यकाल में पंचायत के पैसे की खूब बंदरबांट हुई। सीडीओ ने प्रधानों को कार्रवाई का भरोसा दिया। मामले में जिले के पंचायत सचिवों की बैठक 24 अगस्त को बुलाई गई।
अखिल भारतीय ग्राम प्रधान संघ के जिला अध्यक्ष सचिन मलिक की अगुवाई में प्रधान सीडीओ पूर्ण बोरा से मिले। अफजलगढ़ ब्लॉक के प्रधान डॉ. राजेश कुमार समेत अन्य प्रधानों ने आरोप लगाया कि सचिव उनकी बात नहीं सुनते हैं। विकास कार्य में मनमानी करते है। डॉ. राजेश कुमार ने 15 अगस्त के ध्वजारोहण को लेकर सचिव के व्यवहार का वीडियो कालिंग सीडीओ को सुनाई।
प्रधानों का आरोप है कि सचिव ग्रामीणों से हर काम के पैसे वसूलते हैं। आवास निर्माण के नाम पर पैसे वसूले जा रहे। विकास कार्य के लिए छोटी पंचायतों को कोई पैसा नहीं दिया जा रहा है। प्रधान संघ के जिला अध्यक्ष सचिन मलिक ने अवैध वसूली की जांच कराने तथा विकास कार्य के लिए धन समान रूप से आवंटित करने की मांग की। वहीं सीडीओ पूर्ण बोरा ने बताया कि इस मामले की जांच कराई जाएगी, जांच में जो दोषी मिलेंगे उनका सख्त कार्रवाई होगी।
सचिव कहते हैं कि ऊपर तक जाता है पैसा
प्रधानों ने सीडीओ पूर्ण बोरा को बताया कि जब पंचायत सचिवों से ग्रामीणों से अवैध वसूली नहीं करने के लिए कहा जाता है तो वे पैसा ऊपर तक जाने की बात कह देते हैं। इस पर सीडीओ ने प्रधानों से कहा कि यदि ब्लॉक, सीडीओ कार्यालय या विकास भवन के किसी अन्य कार्यालय में उनके नाम पर पैसा मांगा जाए तो सीधा उनसे आकर बताएं। पैसा मांगने वाले पंचायत सचिव व अधिकारी का नाम बताएं। प्रधान किसी को पैसा न दें और न ही ग्रामीणों से देने दें। यदि कहीं गड़बड़ी मिली तो कार्रवाई होगी।
प्रशासक कार्यकाल में खातों से मोटा पैसा निकला
ग्राम प्रधानों ने सीडीओ पूर्ण बोरा को बताया कि पंचायत चुनाव से पहले पंचायतों में प्रशासक नियुक्त थे। प्रशासकों का कार्यकाल करीब छह माह रहा। आरोप लगाया कि इस दौरान पंचायतों के खातों से विकास कार्य के नाम पर खूब पैसा निकाला गया। काम के नाम पर खानापूर्ति हुई। जांच में सच सामने आ जाएगा। उधर, कमिश्नर के निर्देश पर डीएम उमेश मिश्रा ने जिले की पंचायतों के प्रशासक कार्यकाल के समय खातों आदि की जांच कराई थी। आरोप है कि कई माह बाद भी जांच रिपोर्ट की कोई जानकारी सामने नहीं आई है।