फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bijnor News: गजरौला शिव में होती है मर्यादा और आदर्शों की रामलीला

विज्ञापन
विज्ञापन
- पंडाल में धूम्रपान पर भी रहती है पाबंदी
विज्ञापन

- मंच पर किसी नृतकों के नहीं पड़े कदम



मोहम्मद यूनुस
गजरौला शिव। गजरौला शिव में भगवान श्रीराम के आदर्शों और मर्यादा की रामलीला मंचन होता है। श्रीराम के प्रति ग्रामीणों की इतनी आस्था है कि कोई भी व्यक्ति रामलीला पंडाल के अंदर धूम्रपान तक नहीं कर सकता। 1967 से चल रहे रामलीला मंचन में आज तक भी किसी नृतकों के कदम मंच पर नहीं पड़े। ग्रामीण ही मंचन की पूरी व्यवस्था संभालते हैं।

1962 से शुरू हुआ था नाटकों का मंचन
गांव गजरौला शिव में साल 1962 में नाटकों का मंचन शुरू हुआ था। बिजनौर से आकर मास्टर भागीरथ सिंह युवाओं को अभिनय सिखाते हैं। पौराणिक और ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित नाटक होते थे। धीरे-धीरे गांव में नाटक क्लब बन गया। उस समय लाला रामस्वरूप सिंह, सीताराम सिंह, आशाराम पहाड़ी, गजाधारी सिंह, नंदराम सिंह, खुशीराम सैनी, बुद्धू सिंह सैनी, रवि शेखर शर्मा आदि ने युवाओं को नाटक से जोड़ा।
विज्ञापन

लाला राधेश्याम के घर के सामने केरोसिन की लालटेन की रोशनी में मंचन होता था। मंडावर के कथावाचक पंडित राधाकृष्ण के नेतृत्व में 1967 में श्री रामलीला मंचन की शुरुआत हुई। अब भी रामलीला समाप्ति के बाद दो दिन तक नाटकों का मंचन होता है। दशहरा पर झांकियां एवं अखाड़े निकाले जाते हैं। इसके बाद रावण के पुतले का दहन किया जाता है।

नजीबाबाद में होती थी प्रतियोगिता
रामलीला समाप्ति के बाद नजीबाबाद टीले वाली रामलीला में जिला नाटक प्रतियोगिता होती थी। जिले भर के कलाकार इसमें शामिल होते थे। गजरौला शिव रामलीला समिति के नाटक राजा हरिश्चंद्र प्रथम पुरस्कार मिला था।

सागर सिंह ने 11 साल निभाई श्रीराम की भूमिका
गांव निवासी ठाकुर सिंह बताते हैं कि वे रामलीला का संचालन 65 वर्ष से कर रहे हैं। लाला सागर सिंह ने 11 साल तक श्रीराम की भूमिका निभाई। इनके अलावा विनोद कुमार, पूर्व जिला जज लेखराज सिंह का अभिनय भी सराहनीय है। पूर्व प्रधान महेंद्र सिंह बताते हैं कि गजरौला शिव में गजरौला अचपल व मुकीमपुर धर्मसी के लोग मंचन देखते आते थे लेकिन अब अलग-अलग पंचायतों में मंचन होता है। नरेश कुमार एडवोकेट बताते हैं कि ग्रामीण ही रामलीला की पूरी व्यवस्था संभालते हैं।
विज्ञापन

पीयूष त्रिपाठी बताते हैं कि 1967 में कृष्ण कुमार खजांची रामलीला के संरक्षक थे। लाला रामस्वरूप निर्देशक थे। सेठ महाराज सिंह व अनमोल सिंह रामलीला के प्रधान काफी समय तक रहे। सन 1973 में श्री रामलीला हाल का निर्माण किया गया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें