स्वयं की लिखी पुस्तक से होता है झालू में रामलीला मंचन
झालू। नगर की रामलीला का अलग ही महत्व है। रामलीला मंचन में सभी वर्गों के लोग उत्साह के साथ काम करते हैं। यहां की रामलीला की सबसे मुख्य बात यह है कि रामलीला मंचन की पुस्तक झालू के निवासियों द्वारा लिखित है। यह पुस्तक देवीशरण शास्त्री, बालकृष्ण मिश्रा, काशीराम वेद जी, आशाराम धीमान आदि द्वारा राम चरित्र मानस, राधेश्याम रामायण, जसवंत सिंह रामायण के मिश्रण से मंथन कर लिखी गई है।
नगर पंचायत झालू में डॉ. द्वारिका प्रसाद के प्रतिष्ठान में 1921 से दिन में रामलीला की शुरुआत हुई थी। रात्रि में लीला मंचन का शुभारंभ 1953 में हुआ। 1967 से रामलीला का मंचन रामलीला मैदान में हो रहा है। रामलीला मंचन में देवी प्रसाद शास्त्री रावण का अभिनय करते थे। उन्हीं के घर जन्मे पंडित शिवेश शर्मा तथा मधुसूदन शर्मा ने राम और लक्ष्मण का अभिनय किया। चौधरी भूपेंद्र सिंह राय साहब का कहना है डॉ. बृजभूषण और जयप्रकाश धोबी-धोबन का अभिनय करते थे। उनका अभिनय देखने के लिए दूरदराज के गांवों से धर्म प्रेमी आते थे। उनके अभिनय को देखकर जनता भावुक हो जाती थी। संतोष गोयल ने बताया कि उनके पिता लाला महावीर प्रसाद अग्रवाल राम की भूमिका निभाते थे। रामलीला मंचन होने के उपरांत कई दिनों तक पोरस-सिकंदर, कृष्ण जन्म, महिषासुर वध, भगवती दुर्गा, जसवंत सिंह किरणमई जैसे नाटक होते थे।
नगर के बुजुर्ग चिकित्सक डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह का कहना है कि पहले टीवी और मोबाइल आदि नहीं थे। जनता अपना समय रामलीला मंचन, नाटक, कथाओं आदि में व्यतीत करती थी। अब टीवी, मोबाइल, इंटरनेट आदि होने से लोगों की रुचि रामलीला मंचन, नाटक, कथाओं में कम हो गई है। राजकुमार अग्रवाल का कहना है कि नगर की रामलीला मंचन में कुछ प्रमुख अभिनय देखने के लिए लोग बहुत उत्साहित रहते थी। जिसमें मास्टर राम शरण राम वनवास व लक्ष्मण शक्ति, मास्टर ओमप्रकाश लक्ष्मण, चंद्रपाल सैनी मेघनाथ का अभिनय करते थे। उनका अभिनय देखने के लिए लोगों के दिलों में बहुत ही उत्सुकता रहती थी। रामलीला के डायरेक्टर महेंद्र सिंह धीमान का कहना है कि पहले के समय में रामलीला मंचन प्रारंभ होने से दो तीन माह पहले से अभ्यास प्रारंभ करते थे। कलाकार अपने अभिनय में पूरा रंग जाते थे। रामलीला मंचन के कई दिन उपरांत तक नाटकों का आयोजन होता था, जिसमें मुस्लिम कलाकार भी नाटक खेलते थे।
मुस्लिम समाज के लोग भी देते थे सहयोग
मुल्ला रऊफ और उनके पुत्र कलीम हारमोनियम व हमीद मिरासी तबले की धुन पर लोगों को झूमने पर मजबूर कर देते थे। मास्टर चंद्रपाल सैनी का कहना है कि रामलीला मंचन के बीच में हास्य कलाकार पहुंच कर लोगों को जमकर हंसाते थे। हास्य कलाकार टीम में सुरेश शर्मा, अर्जुन अग्रवाल, राजकुमार अग्रवाल, दिनेश शर्मा शामिल थे। रामलीला प्रधान मोनू चौधरी का कहना है कि सरकार द्वारा जारी की गई कोरोना गाइडलाइन का पूरा पालन किया जाएगा। योगी सरकार ने रामलीला मंचन की अनुमति देकर एक सराहनीय काम किया है।