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रामगंगा बांध परियोजना ने क्षेत्र को दिया शुद्ध पर्यावरण

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रामगंगा बांध परियोजना ने क्षेत्र को दिया शुद्ध पर्यावरण
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कालागढ़। रामगंगा बांध परियोजना से क्षेत्र को शुद्ध पर्यावरण मिला। कार्बेट के वनों में वन, वन्यजीव समृद्ध हुए तो उत्तर प्रदेश के अनेक जनपदों में पानी की समस्या दूर हुई। पर्यावरण संरक्षण में कालागढ़ देश विदेश में चर्चा में आया।
रामगंगा बांध परियोजना कालागढ़ में आबादी से लगभग 14 किमी दूर शिवालिक पर्वतों के बीच रामगंगा नदी पर बांध बनाकर तैयार की गई। 1957 में शुरू हुई यह परियोजना 1974 में बनकर तैयार हुई। परियोजना से पहले इस इलाके में बीहड़ हुआ करता था। यहां पानी की कमी थी। बिजनौर जनपद की उत्तरी सीमा कालागढ़ से स्पर्श करती है। इस इलाके में किसान अरहर की दाल, मसूर,तिल, उड़द जैसी फसलों को उगाया करते थे। सिंचाई के लिए वह हमेशा ही बरसात पर निर्भर करते थे।
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1974 से रामगंगा बांध में पानी का संग्रह होने से पूरे इलाके का जलस्तर ऊपर उठ आया। बांध से फीका दोआब आदि नहरें निकाली गईं। बिजनौर का इलाका पानी से भरपूर हो गया। यहां चावल, गन्ना, गेहूं उगाया जाने लगा। घरों में खुशहाली आने लगी। उधर रामगंगा बांध के जलाशय में पानी का संग्रह होने से कालागढ़ से लैंसडान तक लगभग 80 वर्ग किमी की झील का निर्माण हो गया। कार्बेट पार्क के वनों को इससे मिलने वाले पानी से हरियाली आ गई। हाथी व बाघ जैसे जीवों को वनों में ही पानी मिलने लगा। सबसे अधिक जीव कालागढ़ से ढिकाला तक इस नदी पर आश्रित हो गए। जलाशय के संरक्षण में आ जाने से नदी में जलीय जीवों मगरमच्छ, उदबिलाव, घड़ियाल, महाशेर, गोंच मछली को समृद्धि मिली।
कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान को घनत्व के रूप में विश्व में बाघों की राजधानी का दर्जा मिला। वहीं यहां भारत सरकार ने हाथी परियोजना, बाघ परियोजना शुरू कीं। रामगंगा नदी का कल कल बहता जल पूरे क्षेत्र को स्वच्छ व निर्मल पर्यावरण प्रदान कर रहा है। वहीं सुंदर व मनोहारी दृश्य किसी को भी अपने मोहपाश में बांधने में सक्षम हैं।
देश विदेश की हस्तियां भी कायल
कालागढ़ की रामगंगा नदी में प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी, स्वीडन के राजा रानी भ्रमण कर चुके हैं। वहीं वेयर ग्रिल्स के कदम भी यहां के जंगलों में पड़ चुके हैं।
पर्यटन को मिला बढ़ावा
कार्बेट टाइगर रिजर्व के वार्डन रमाकांत तिवारी का कहना है कि पर्यावरण स्वच्छ होने के कारण यहां पर्यटन का विकास हुआ है। यहां देश विदेश के पर्यटक आते हैं। यहां हाथी को पर्याप्त जल मिला है। बाघ का संरक्षण होने से पर्यावरण का शुद्ध होना स्वाभाविक है। कालागढ़ के वन क्षेत्राधिकारी आरके भट्ट का कहना है कि कालागढ़ रेंज में कालागढ़, धारा, केंद्रीय कालोनी में पर्यटन विकसित किए गए हैं।
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उत्तर प्रदेश को मिलता है छह लाख हेक्टेयर पानी
रामगंगा बांध के ईई नीरज कुमार त्यागी का कहना है कि रामगंगा बांध में मानसून की अवधि में पर्वतों से 313400 हेक्टेयर से पानी का कालागढ़ में संग्रह किया जाता है। संग्रहीत जल से बिजली उत्पादन कर उत्तर प्रदेश में छह लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जाती है।
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