नजीबाबाद के भागूवाला क्षेत्र की कोटावाली नदी के रपटे से गुजरती बस।
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भागूवाला में पहाड़ और मैदान क्षेत्र हो रही वर्षा से बरसाती नदियों में रुक-रुक कर उफान आने से नदी तट पर बसे लोगों में बाढ़ को लेकर भय है। शुक्रवार रात कोटावाली नदी रपटे पर जलस्तर बढ़ने से भारी वाहनों सहित कांवड़ियों के वाहनों का रूट डायवर्ट करने से उन्हें परेशानी झेलनी पड़ी।
श्रावण मास में शिवभक्तों का कांवड़ों में हरिद्वार से गंगाजल लाने के लिए नजीबाबाद-हरिद्वार नेशनल हाईवे बड़ी संख्या में आवाजाही बढ़ गई है। कांवड़ियों के जत्थे भारी वाहनों से हरिद्वार पहुंच रहे हैं। मैदानी और पर्वतीय क्षेत्र में रुक-रुक हो रही तेज वर्षा से नेशनल हाइवे से निकलने वाली मालन, कोटावाली, रवासन नदी में जल स्तर बढ़-घट रहा है। शुक्रवार की देर रात तेज वर्षा से कोटावाली नदी रपटे पर जलस्तर बढ़ गया। सेतु निर्माण इकाई और पुलिस कर्मियों ने रपटे क्षेत्र से गुजरने वाले वाहनों को तत्काल रोक दिया, जिससे कांवड़ यात्रियों सहित राहगीरों को परेशानी झेलनी पड़ी। पुलिस ने भारी वाहनों को पूर्वी गंगनहर चंदक हैड से डायवर्ट कर उनके गंतव्य के लिए रवाना किया। करीब दो घंटे बाद रपटे से जल स्तर घटने पर भारी रपटा क्षेत्र से गुजरने वाले भारी वाहनों ने राहत की सांस ली। कई बार मालन नदी का जलस्तर चढ़ने-उतरने से गांव खैरुल्लापुर, बड़िया से जुड़े ग्रामीण क्षेत्रों में मिट्टी का कटान होने से क्षेत्रीय ग्रामीणों में बेचैनी बनी है।
कालागढ़ मंे 107 मिमी बारिश दर्ज
कालागढ़ में कालागढ़ में तेज बारिश जारी होने से मौसमी नदी नालों में उफान आ गया है। 24 घंटों के दौरान कालागढ़ में 107 मिमी बारिश रिकार्ड की गई। वहीं पहाड़ों पर हो रही बारिश के चलते रामगंगा बांध का जलस्तर भी तेजी से बढ़ रहा है। नियंत्रण कक्ष के अनुसार मारचूला से 2000 क्यूसेक पानी बांध के जलाशय की ओर आ रहा है। सुबह आठ बजे बांध का जलस्तर 330.8 मीटर था। जो दोपहर को दो बजे 331.50 मीटर हो गया। इसके अलावा बारिश के कारण मौसमी नदी नाले भी उफान पर है। शिवालिक पर्वत मालाओं से निकले सूखास्रोत, मैग्जीन स्रोत, चौड़ा स्रोत, धारा स्रोत आदि उफान पर आ गए हैं। सूखास्रोत के पानी से पुराने कालागढ़ में मुख्य मार्ग पर बने पुल का नीचे का हिस्सा खोखला होता जा रहा है। इससे पुल को खतरा पैदा हो गया। एक यही पुल है जिससे कालागढ़ धामपुर मार्ग जुड़ता है। इसके बंद होने पर कालागढ़ में वाहनों का आवागमन संभव नही है। पहाड़ों से आ रहे पानी का बहाव इतना तेज है कि पुराने कालागढ़ में स्रोत की पिचिंग भी कट रही है।