बिजनौर में गेहूं की कई नई प्रजातियां जिले में आ गई हैं। ये प्रजातियां कम पानी होने पर अधिक पैदावार लेने का रिकार्ड बना चुकी हैं। इन प्रजातियों में खनिज लवणों की भरमार होने के साथ ही रोटी को स्वादिष्ट बनाने वाला पदार्थ ग्लु स्कोर पर्याप्त मात्रा में है।
जिला कृषि अधिकारी प्रमोद सिरोही के अनुसार हरियाणा के करनाल तथा हिसार व्हीट इंस्टीटयूट से गेहूं की एचडी 2967,डीबीडब्लू 88, तथा डब्लूएच 1105 प्रजातियों का ब्रीडर सीड लाया गया। इसके बाद जिले में आधार बीज तैयार किया गया। यह बीज किसानों को बांटा जाएगा। इन प्रजातियों की प्रतिरोधक क्षमता अधिक होने से रस्ट तथा स्मट बीमारियों का असर नही होता है। एचडी 2967 प्रजाति बौनी है। पौधे की ऊंचाई 101 सेमी तथा पैदावार 60 क्विंटल प्रति हेक्टेअर है। डीबीडब्लू प्रजाति में ग्लु स्कोर की मात्रा अधिक होती है। डब्लूएच 1105 के पौधे की ऊचाई 100 सेमी है। इसकी बाली बड़ी और सुनहरी होती है। इसकी पैदावार 70 क्विंटल प्रति हेक्टेअर है।
उन्होंने बताया कि लेट वैरायटी में डीबीडब्लू 71 के अच्छे परिणाम आ रहे हैं। पौधे की ऊचाई मात्र 95 सेमी है। इसमें कम मात्रा में ही यूरिया डालने से काम चल जाता है। प्रजातियों की परिपक्वता 127 से 157 दिन है। बीज सभी सरकारी केंद्रों पर उपलब्ध है। गेंहू की नई प्रजातियां किसानों के लिए मुनाफे का सौदा साबित होगी। जिला कृषि अधिकारी के मुताबिक डबलूएच 1105 प्रजाति ब्रेड, पिज्जा, पास्ता और बिस्कुट बनाने के लिए उपयुक्त है। प्रजाति का इंडस्ट्रीयल यूज होने से बिजनौर कंपनियों के लिए खरीददारी का मार्केट बन सकेगा। सभी प्रजातियां जिले के जलवायु के लिए अनुकूल हैं। अधिकारी के अनुसार गेहूं की बुवाई 15 अक्ूतूबर से शुरू होकर 15 नवंबर तक चलेगी। किसान जमीन तैयार करने में जुट जाएं। वहीं अफजलगढ़। गन्ना विकास समिति कार्यालय के प्रांगण में किसानों के लिए दो दिवसीय किसान सट्टा प्रदर्शन मेले का आयोजन तीन और चार अक्तूबर को होगा। समिति के सचिव प्रकाशवीर सिंह ने बताया कि मेले में किसान बेसिक कोटा, गन्ना क्षेत्रफल, सट्टा समस्या का निराकरण करा सकते हैं।