बालावाली क्षेत्र में बारिश से बढ़ा गंगा का जलस्तर।
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बिजनौर में पहाड़ों पर बारिश होने से खादर क्षेत्र में गंगा किनारे बसे गांव के किसानों का संघर्ष फिर से शुरू हो गया है। बारिश से गंगा का जलस्तर बढ़ने से किसानों को गंगा पार कर खेतों में जाने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गंगा में पानी की धारा भी तेज होने लगी हो। गंगा में पानी बढ़कर एक लाख क्यूसेक हो गया है। भीमगोडा से और एक लाख क्यूसेक पानी गंगा में छोड़ा गया है।
जिले से मानसून अब तक भले ही रूठा रहा हो, लेकिन पड़ोसी राज्य उत्तराखंड में मानसून ने मेहरबानी दिखाई और जमकर बारिश की है। पहाड़ों पर बारिश होने का खामियाजा खादर क्षेत्र में गंगा किनारे बसे तटीय गांव राजारामपुर, सीमली, डैबलगढ़, वीरूवाला, कोहरपुर, चाहड़वाला, रावली, ब्रह्मपुरी, कुंदनपुर टीप, मिर्जापुर आदि के किसानों को उठाना पड़ता है। पहाड़ों पर बारिश शुरू होते ही गंगा का जलस्तर बढ़ना शुरू हो जाता है। एक डेढ़ महीने पहले जहां गंगा में दस हजार क्यूसेक पानी था, अब बढ़कर 70 हजार क्यूसेक हो गया है। शनिवार को भीमगोड़ा हरिद्वार से एक लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। वह भी शनिवार रात तक आ जाएगा। इन सब गांव वालों के खेत गंगा पार स्थित हैं। ऐसे में इनको जान हथेली पर लेकर पशुओं का चारा आदि लेन व अन्य कार्य से नाव के सहारे गंगा पार कर जाना पड़ता है। इससे गंगा का जलस्तर और बढ़ जाएगा। किसानों राजेश कुमार, टीकम सिंह, धर्मवीर सिंह, ब्रह्मपाल सिंह, मनोज कुमार आदि के अनुसार खेत तो गंगा पार ही रहेंगे, लेकिन कटान को रोकने के लिए उत्तराखंड सरकार ने धारा के दूसरी ओर गंगा के किनारे तटबंध बनवाए हैं। इससे गंगा का पानी वहां कटान करने के बजाए हमारी तरफ ही जोर मारेगा। मध्य गंगा बैराज के एक्सईएन एसएस गिरि के अनुसार गंगा में 70 हजार क्यूसेक पानी चल रहा है। भीम गोड़ा हरिद्वार से एक लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। वह 12 घंटे बाद तक बिजनौर पहुंचेगा। गंगा में जो जल चल रहा है, उससे कोई खतरा नहीं है।