पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन की काट को बिजनौर में हुए रचित हत्याकांड का मुद्दा बना रही है। यही वजह है कि भाजपा के तमाम नेता रचित के परिवार की मदद के लिए आगे आए हैं। अन्य कोई दल इस मामले में आगे नहीं आया है। मामला दो वर्गों से जुड़ा है और भाजपा इसको लेकर आक्रामक तेवर रुख अपना रही है।
किसान आंदोलन को लेकर सियासत गरमाई हुई है और भाकियू को रालोद का साथ भी मिल गया है। जाटों में रालोद और भाकियू का अच्छा खासा असर है। बिजनौर, मुजफ्फरनगर, शामली व अमरोहा की पंचायत में जाटों के साथ मुस्लिम भी बड़ी तादाद में गए। भाजपा इसकी काट ढूंढने में लगी थी।
शुक्रवार को कस्बा झालू में सरे बाजार हुई रचित की हत्या के बाद से एक वर्ग में भारी आक्रोश है। रचित जाट बिरादरी से था। विरोधी भी इस घटना के बाद से उसके परिवार के साथ खड़े हो गए हैं। भाजयुमो के जिलाध्यक्ष ने रवि चौधरी ने घटना के बाज एसपी का घेराव करके इस मुद्दे को हवा दे दी।
पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह ने घटना के बाद झालू को दौरा किया। परिवहन मंत्री अशोक कटारिया भी रचित के घर गए। भाजपा नेता मुजफ्फरनगर के कवाल कांड का जिक्र करना भी नहीं भूले। कहा कि कवाल जैसी घटनाएं ऐसी घटनाओं से ही पनपती है।
भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष मोहित बेनीवाल भी बुधवार को जिले के कई विधायक व नेताओं को लेकर रचित के घर पर गए। गुरुवार को रचित की तेरहवीं है, जिसमें केंद्रीय राज्यमंत्री संजीव बालियान समेत कई नेताओं के पहुंचने की उम्मीद है। शुक्रवार को जिले के प्रभारी मंत्री कपिल देव अग्रवाल भी रचित के घर पहुंच रहे हैं।
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