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Bijnor News: आरक्षित वन क्षेत्र में अवैध फसल पर उठे सवाल, सोता रहा सिस्टम

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बिजनौर। बिजनौर वन रेंज के आरक्षित वन क्षेत्रों में अवैध फसल उगाने की जांच का दायरा अब बढ़ सकता है। जहां उच्चाधिकारियों ने भी इस मामले में संज्ञान लिया है, वहीं कई सवाल भी वन विभाग के सिस्टम पर उठने लगे हैं। इसमें फसल उगाने के बाद जानकारी न होने की बात सभी को खटक रही है। इस मामले में अब तक वन दरोगा और वन रक्षक निलंबित हो चुके हैं। वहीं रेंजर बिजनौर की जांच भी शुरू हो चुकी है।
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बिजनौर वन रेंज के गंगा खादर रावली, जहानाबाद में पिछले कुछ सालों में पौधरोपण कराया गया। प्रति एक हेक्टेयर में 1100 पौधे लगाए गए थे। अवैध खेती करने वालों के ट्रैक्टर छोड़ने की शिकायत हुई तो वन अफसर जागे। एसडीओ ज्ञान सिंह को इस मामले की जांच भी सौंपी गई। प्राथमिक जांच में 161 हेक्टेयर पौधरोपण खेती वाली जगह पर खराब होने की बात सामने आई तो वन दरोगा मदनपाल और वन रक्षक मोहित कुमार को निलंबित कर दिया गया। इसी के साथ बिजनौर वन रेंजर महेश गौतम की जांच शुरू कर दी। उन्होंने अपना पक्ष रखा कि क्षेत्र में तैनात वनकर्मियों ने इसकी सूचना ही नहीं दी। बुधवार को मुरादाबाद सीएफ रमेशचंद की ओर से भी बिजनौर डीएफओ से इस संबंध में जवाब मांगा गया।

गश्त नहीं हुई या मिलीभगत थी
यह बात किसी से छिपी नहीं है कि हर साल गंगा खादर में हजारों बीघा में अवैध खेती होती है। वन विभाग और प्रशासन की ओर से ट्रैक्टर पकड़ना और कुछ हिस्से में फसल नष्ट कराने की रस्म अदायगी भी हर बार की जाती है, बावजूद इसके अवैध खेती नहीं रुकती। इस बार यह अवैध खेती वन विभाग के पौधरोपण वाली जगहों तक पहुंच गई और सरसों, गेहूं और गन्ने की फसल लहलहाने लगी। बस वहां लगे पौधे मुरझा गए। वन अफसरों अब अब सवाल उठ रहे हैं कि गश्त नहीं हुई कि यह सब मिलीभगत का खेल रहा।
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कई बिंदुओं पर जांच चल रही है। फसल कैसे उगाई गई, कहां लापरवाही हुई, इनकी भी जांच चल रही है। -जय सिंह कुशवाह, डीएफओ बिजनौर
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