कठपुतली का तमाशा, सामाजिक बुराइयों पर तमाचा
धामपुर (बिजनौर)। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी लखनऊ, संस्कृति विभाग की ओर से जिला प्रशासन बिजनौर एवं नाट्यदीप फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित चार दिवसीय लोक नाट्य समारोह के तीसरे दिन शुक्रवार रात स्वांग रूप बसंत तथा कठपुतली गुलाबो-सिताबो का मंचन हुआ। रूप बसंत के स्वांग के मंचन को दर्शक भावविभोर हो गए।
कठपुतली गुलाबो-सिताबो पारंपरिक विधा का प्रदर्शन किया गया। कठपुतली के माध्यम से ईर्ष्या, द्वेष, मतभेद से होने वाले आर्थिक, सामाजिक प्रतिष्ठा के क्षरण का प्रदर्शन किया गया। दिखाया गया कि विद्वान, विदुषी भी ईर्ष्या में अपनी प्रतिष्ठा खो देते हैं। सामाजिक प्रतिष्ठा की हानि होती है। चित्रण कला मंच समिति, लखनऊ के विपिन कुमार, नरेश मौर्य, रुपेश, पूजा तथा अनूप शर्मा द्वारा इसे प्रस्तुत किया गया। डॉ. राजेंद्र चौधरी के संयोजन में आयोजित कार्यक्रम में मुजीबुर्रहमान, उमाशंकर शर्मा, जगन्नाथ, आदित्य सिंह, उदयराज सिंह, अनिल रस्तोगी, शीतल रस्तोगी, तिलक राणा, अजय चौहान, कामेश गुप्ता, कुलदीप, जुगनू, सुधीर कुमार, जसराम सिंह, कैलाश कुमार, राजवीर माथुर, प्रहलाद, मार्दव जैन आदि का सहयोग रहा।
रूप बसंत नाटक के माध्यम से संदेश देने का प्रयास किया गया कि व्यक्ति का चरित्र ही उसकी सबसे बड़ी पूंजी है। चरित्रहीन व्यक्ति का सामाजिक पतन होता है। चरित्रवान व्यक्ति ही समाज में प्रतिष्ठा प्राप्त करता है।
शुक्रवार रात शुभम मंडप में आयोजित नाटक का शुभारंभ उपजिलाधिकारी विजयवर्धन तोमर एवं राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के अविनाश देश पांडे ने नटराज के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन से किया।