- गंगा में पाई जाती हैं कछुओं की 12 प्रजातियां
- दस प्रजातियों पर है संकट, शिकार और तस्करी बड़ा कारण
रजनीश त्यागी
फोटो समाचार
बिजनौर। गंगा में यूं तो कछुओं की 12 प्रजातियां पाई जाती हैं, लेकिन इसमें से 10 प्रजातियों पर संकट गहरा गया है। लगातार गंगा में कछुआ संरक्षण कार्यक्रम चल रहा है, वहीं दूसरी ओर कछुओं का शिकार इन अभियान को पलीता लगा रहा है। मंडावर के पास रविवार को कछुओं की तस्कारी पकड़ी गई तो गंगा में कछुओं के शिकार की हकीकत सामने आ गई। इससे पहले भी गंगा में कई बार शिकारी पकड़े जा चुके हैं।
कछुओं को गंगा का प्राकृतिक सफाईकर्मी कहा जाता है। गंगा में कछुओं की 12 प्रजातियां पाई जाती हैं। हालात यह है कि लगातार गंगा में कछुओं की संख्या घट रही है। इस कारण वर्ष 2012 से डब्ल्यूडब्ल्यूएफ संरक्षण अभियान भी चला रहा है। कुछ पैसों के लालच और अंधविश्वास के कारण गंगा के कछुए तस्करों की भेंट चढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों की माने तो गंगा में दस प्रजातियों के कछुओं की संख्या बहुत घट गई है। यही कारण है कि इन्हें संकटग्रस्त भी माना गया है। (संवाद)
गंगा में कछुओं की यह प्रजातियां है मौजूद
गंगा में इंडियन ब्लैक टर्टल, ब्लैक पॉड टर्टल, ब्रह्मिणी रिवर टर्टल, ब्राउन रूफड टर्टल, इंडियर रूफड टर्टल, इंडियन टैंट टर्टल, थ्री स्ट्रप्डि रूफड टर्टल, रेड क्राउंड रूफड टर्टल, इंडियन फलैप्सेल टर्टल, इंडियन सॉफ्टशेल टर्टल, इंडियन पीकॉक सॉफ्टशेल टर्टल, इंडियर नैरो हेडेड सॉफ्टशेल टर्टल नाम की प्रजातियां मौजूद हैं।
कछुओं पर कुछ महत्वपूर्ण तथ्य
- विश्व में कछुओं की 300 से ज्यादा प्रजातियां पाई जाती है
- भारत में कछुओं की 29 प्रजातियां ही मिलती हैं
- उत्तर प्रदेश में मात्र 12 प्रजातियां ही कछुओं की मिलती है, यह सभी गंगा में मौजूद हैं
- किसी भी भारतीय प्रजाति के कछुए को पालना, शिकार करना प्रतिबंधित है
कोट
यदि कोई कछुए का शिकार करता या पालना मिलता है तो उस पर वन्य जीव अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसमें सात साल तक की सजा का प्रावधान है। गंगा के आसपास सर्च अभियान भी चलाया जाएगा, ताकि कछुओं को पकड़ने वालों पर कार्रवाई हो सके - ज्ञान सिंह, एसडीओ वन विभाग
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कछुआ संरक्षण पर हम वर्ष 2012 से काम कर रहे हैं। कछुओं के अंडे एकत्रित कर, उनसे बच्चे निकालते हैं और फिर गंगा में छोड़ते हैं। ताकि गंगा की जैव विविधता बनी रहे। यह बात सही है आज गंगा में कछुओं पर संकट है, इसके लिए इनका शिकार रोका जाना बहुत जरूरी है - संजीव यादव, सीनियर कॉर्डिनेटर, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ