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कार्बेट टाइगर रिजर्व में निशाचर पक्षी का हो रहा संरक्षण

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कालागढ़ में फ्रूट बैट प्रजाति की चमगादड़ - फोटो : DHAMPUR
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कार्बेट टाइगर रिजर्व में निशाचर पक्षी का हो रहा संरक्षण
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अथहर महमूद सिद्दीकी
कालागढ़। कार्बेट टाइगर रिजर्व के वनों में निशाचर पक्षियों के संरक्षण के चलते पर्यावरण शुद्ध बना हुआ है। वनों में चमगादड़, उल्लू व नाइटजार पक्षी का संरक्षण वन विभाग कर रहा है। ध्वनि प्रदूषण व प्रकाश प्रदूषण की वजह से लुप्त हो चले इस पक्षी को बचाने के लिए प्राकृतावास को मानव प्रवेश से बचाकर रखा गया है। नो मैन्स लैंड जैसा वातावरण इनके रिहायशी इलाकों में दिया जा रहा है।
यूं तो कार्बेट टाइगर रिजर्व/नेशनल पार्क के जंगल रंग बिरंगे पक्षियों के कलरव से भरपूर रहते हैं। रात्रि में उड़ान भरने वाले पक्षियों के संरक्षण की कवायद भी रंग लाई है। चमगादड़ की यहां पांच प्रजातियां फ्रूट बैट प्रजातियां पाई जाती हैं। इन पक्षियों को वन विभाग शिकारियों से बचाने के लिए विशेष गश्त कराता है। वन अधिनियमों के तहत शिकार करने पर पाबंदी है। पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी के लिए यह जीव बहुत खास हैं। यह वनों में अनेक प्रकार की वनस्पति का परागण भी करता है। चमगादड़ आबादी से दूर वनों में गुफाओं व अंधेरे हिस्सों में पाए जाते हैं। फलों के बीजों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर लाने से जंगल में अन्य जीवों को इसका लाभ मिलता है। कार्बेट के आसपास के गांवों आदि में खेतों में प्रयोग होने वाले रसायन व रोशनी प्रदूषण इनके जीवन को खतरा बन रहा है।
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पर्यावरण के लिए खास है चमगादड़
कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. धीरज पांडेय का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण व पारिस्थितिकी तंत्र के लिए यह पक्षी खास भूमिका निभाता है। हानिकारक कीटों को खाकर वनस्पति की सुरक्षा करता है। इसके संरक्षण के लिए इस पक्षी के प्राकृतावास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जिन क्षेत्रों में यह पक्षी मौजूद है वहां नो मैन्स लैंड जैसा माहौल दिया जा रहा है। वनों में बिजली के बल्ब आदि रात्रि में अपरिहार्य स्थिति में ही जलाए जाते हैं। जन जाग्रति के लिए इसके बारे में आम जनता को भी बताया जाएगा।
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संरक्षण किया जाना आवश्यक
कार्बेट टाइगर रिजर्व के वैज्ञानिक डॉ. शाह बिलाल का कहना है कि चमगादड़ रात्रिचर है। इसके संरक्षण की आवश्यकता है। यह दुर्लभ और लुप्त प्राय है। भवनों के बन जाने के कारण यह जीव अब आम नजरों से दूर है। इसके लिए जनता को भी सहयोग करना चाहिए। कार्बेट टाइगर रिजर्व में इसकी पांच प्रजाति पाई जाती हैं। जबकि भारत में 128 प्रजाति इस पक्षी की हैं। उत्तराखंड में 32 प्रजाति मौजूद हैं। वैज्ञानिक भी इनका अध्ययन कर रहे हैं।
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