खाड़ी देशों में बिकेंगे जैविक गन्ने से बने उत्पाद
अजीत चौधरी
बिजनौर। गंगा तटीय गांवों में जैविक गन्ने से बना गुड़ अब खाड़ी देशों में बेचा जाएगा। आम की तरह जिले से जैविक विधि से तैयार किया गया गुड़ भी खाड़ी देशों में बेचा जाएगा। इससे जिले के गुड़ को बड़ा बाजार मिलेगा और गन्ने की जैविक खेती करने वाले किसानों को फायदा होगा। गुड़ का सैंपल खाड़ी देशों को भेज दिया गया है। पसंद आने पर वहां से आर्डर मिलने शुरू हो जाएंगे। गुड़ के बाद सब्जी व अन्य फसलों को निर्यात करने पर भी काम किया जाएगा।
गंगा किनारे पांच किमी के दायरे में आने वाले गांवों में किसानों को नमामि गंगे अभियान के अंतर्गत जैविक खेती कराई जा रही है। जिले के 46 गांवों को इस योजना में चिह्नित किया गया है। इन गांवों में जैविक खेती शुरू करा दी गई है। किसानों को खेतों में रासायनिक खाद डालने के बजाए जैविक खाद डालने को जागरूक किया जा रहा है। जैविक खेती का यह दूसरा साल है। किसानों ने पिछले साल जो गेहूं व धान की फसल बोई थी वह स्थानीय स्तर पर ही महंगे दामों में बिक गई थी। जिन किसानों ने जैविक गन्ना बोकर उसका गुड़ बनवाया था, कंपनियों ने वह गुड़ गांव से आकर 70 रुपये प्रति किलो तक में खरीदा था। बाहर ले जाकर ये गुड़ 100 रुपये प्रति किलो तक में बेचा गया। अब जैविक फसलों को स्थानीय के साथ साथ खाड़ी देशों का बड़ा बाजार भी मिलने जा रहा है। हिंदुस्तान एग्रो किसानों से सीधे गुड़ खरीदकर खाड़ी देशों में बेचेगी। खाड़ी देशों से किसानों को गुड़ की और अच्छी कीमत मिलेगी। हाल में हिंदुस्तान एग्रो सहित कई निर्यातक कंपनी ने किसानों से बागों से सीधे आम खरीदकर खाड़ी देशों में बेचा है।
1200 हेक्टेयर जमीन में हो रही जैविक खेती
कृषि विभाग द्वारा जैविक खेती कराने के लिए 46 गांवों का चयन किया गया है। इन गांवों में दस हजार 449 हेक्टेयर जमीन है। शुरुआत में दो हजार 659 हेक्टेयर जमीन को जैविक खेती के लिए चुना गया है। इस बार 946 हेक्टेयर जमीन में गन्ना, 12 में बाजरा, 218 हेक्टेयर में धान व 35 हेक्टेयर में अन्य फसलें हैं।
सब्जी की जैविक खेती बदलेगी किस्मत
सब्जी की जैविक खेती किसानों की किस्मत बदल सकती है। सब्जी में आमदनी ज्यादा होती है और एक साल में तीन फसल तक बोई जा सकती हैं। खाड़ी देशों में जैविक सब्जी के अच्छे दाम किसानों को मिल सकते हैं।
सीधे खेत से बिक रहा गुड़
नमामि गंगे अभियान के तहत किसानों को जैविक खेती ही नहीं कराई जा रही बल्कि उन्हें बाजार भी उपलब्ध कराया जा रहा है। गन्ने की जैविक खेती करने वाले किसान खुद गुड़ तैयार करके बेच रहे हैं। कृषि सुधार कानूनों की वजह से व्यापारी भी सीधे खेत से आकर किसानों से नगद में उत्पाद खरीद रहे हैं। किसानों को गन्ना पर्ची या भुगतान के लिए चीनी मिलों की ओर नहीं देखना पड़ता है।
सब्जी की जैविक खेती कराने पर भी जोर
हिंदुस्तान एग्रो के मैनेजिंग डायरेक्टर मोहम्मद शुऐब ने बताया कि खाड़ी देशों में जैविक गन्ने का गुड़ भेजा गया है। गुड़ पसंद आ गया तो ऑर्डर मिलने शुरू हो जाएंगे। इससे किसानों को फायदा होगा। सब्जी की जैविक खेती कराने के लिए भी किसानों से संपर्क किया जा रहा है।